Covid-19 special प्रेरणादायक लेख भोपाल मुरैना

कोरोना- कल, आज और कल – सुनील सिंह तोमर

भोपाल – 30 जनबरी 2020 का बो दिन जब कोरोना चीन के रास्ते देश में दस्तक दे चुका था, भय संसय और कोतुहल जैसे विचार लोगों के मन में मलीन होने लगे थे, मार्च का अंतिम पखवाडा आते आते और केन्द्र सरकार द्नारा लगाऐ गऐ संपूर्ण लाॅकडाउन ने लोगों के उस संसय पर भी पूर्ण विराम लगा दिया, ये कोरोना की पहली लहर थी, मुंह पर मास्क और जेब में सैनेटाईजर रखना लोगों की मजबूरी बन चुके थे, अस्पतालों में मरीजों की बडती संख्या और बडते मोतों के आंकडों ने लोंगों के फांसलों को भी बडा दिया था ,लाॅकडाउन की बजह से दफ्तर कम लोगों के साथ काम करने लगे, फेक्ट्रियां बंद होने लगीं अब लोगों के सामने बडी समस्या खडी होने बाली थी, बो थी पेट पालने की1 कहते हैं समय बडी से बडी समस्या का भी समाधान निकाल ही लेता है1 और बो रास्ता था बर्कफ्राॅम होम का
दिसंबर का महीना देश को एक नई दिशा देने बाला था,,संक्रमितों की संख्या कम होने लगी थी,, वैक्सीन की उम्मीद भी लोगों के ईम्यूनिटी सिस्टम में बूस्टर का काम कर रही थी,,लेकिन साथ ही साथ लोग कोरोना की दूसरी लहर से भी बाखिफ थे, जिसके लिए बैज्ञानिक पहले ही आघा कर चुके थे, ,सामान्य से हो रहे जन जीवन को भी पता था की खतरा अभी गया नहीं हैं, लेकिन पता नहीं था कि ऐ इतनी जल्द आयेगा और बो भी पहले से भी ज्यादा विकराल रूप में, जिसकी सुरुआत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ हो चुकी थी,, ऐ कोरोना के दूसरी लहर की दस्तक थी,,,चुनाव की तारीखें आते आते कोरोना फिर से पूरे देश को अपनी चपेट में ले चुका था, संक्रमितों की संख्या पहले से कहीं ज्यादा थी, अस्पताल भी क्षमता से ज्यादा मरीज रखने के मामलों में 100 मों से 100 नंबर पा चुके थे, मरने बालों का आंकडा केन्द्र से लेकर राज्य सरकारों के माथे पर चिंता की लकीरें बडा रहा था, देश के कोने कोने से आई रेमडेसिविर इंजेक्सन और आक्सीजन की कमी से मरने वालों कीं हर्दय विदारक तस्वीरें इस सिस्टम को चिडा रहीं थीं,,ऐसा लग रहा था मानों कोरोना भारत में अपना एक बर्श पूर्ण होने का जश्न मना रहा हो,,,, लेकिन कहते हैं वक्त एक सा नहीं रहता, सरकारों पर दबाब बडा,वैक्सीनेसन की गती तेज हुई कोरोना से जंग युद्ध स्तर पर लडी जाने लगी और एक बार फिर इस पर काबू पा लिया गया,,

लेकिन अब भय सता रहा हे कोरोना की तीसरी लहर का, जिसके बारे में भी बैज्ञानिक अगस्त से सितम्बर के बीच आने का अंदेसा लगा चुके हैं,, जिसके संकेत भी कई राज्यों आई खबरों से मिलने लगे हैं

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