मध्य प्रदेश मुरैना

 ‌ “अटल एक्सप्रेस वे” की सीमा के अंतर्गत चंबल के बीहड़ की भूमि पर पीढ़ियों से काबिल किसानों के कब्जे दर्ज कर ,उन्हें भी अन्यंत्र कृषि के लिए चंबल वीहड भूमि के पट्टे दिए जाएं। किसान सभा


मुरैना भीमसेन सिंह तोमर। विशेष संवाददाता। – “अटल एक्सप्रेस वे” के नाम से चंबल के बीहड़ में वर्ष 2013 से हाईवे निर्माण की घोषणाएं लगातार की जा रही है। बर्ष 2018 के चुनाव से पूर्व भी इस हाईवे का शिलान्यास किया गया । अब इस प्रोजेक्ट को भारत माला प्रोजेक्ट फेज 1 में जोड़ दिया गया है। एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए भिंड मुरैना श्योपुरकलां सहित सभी जगह भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई जारी है। इस भूमि अधिग्रहण में जिन किसानों के पास मालिकाना स्वत्व है, उन्हें तो जमीन के बदले दुगनी जमीन देने की बात की गई है। लेकिन ऐसे हजारों परिवार हैं जो पीढ़ियों से चंबल वीहड की जमीन पर खेती कर अपने परिवार का जीवन यापन कर रहे हैं। जिनकी जमीन सरकारी बताकर एक्सप्रेस वे के लिए ली जा रही है। न तो उनका किसी तरह का कब्जा दर्ज किया जा रहा है, और नहीं उन्हें अन्यत्र कहीं कृषि के लिए जमीन आवंटित की जा रही है। मध्य प्रदेश किसान सभा की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक तिवारी ने कहा है कि “अटल एक्सप्रेस वे” की सीमा के अंतर्गत जिन किसानों की जमीन है, उसे दर्ज किया जाए। सरकारी जमीनों पर जो किसान पीढ़ियों से काबिज होकर काश्तकारी कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं, उनके भी कब्जे दर्ज किए जाएं। उन्हें भी वीहड में अनंत्र कहीं कृषि के लिए भूमि आवंटित की जाए। एक ओर कोरोना काल में किसानों की और अन्य सभी की हालत खराब हो गई है। दूसरी ओर अटल एक्सप्रेस वे के लिए उन्हें हटा दिया जाएगा और अन्यंत्र कहीं पुनर्वास व रोजगार की व्यवस्था नहीं होने से उनके सामने भुखमरी का संकट पैदा होगा। ऐसी दशा में हजारों परिवार भूखों मरने की स्थिति में आ जाएंगे। किसान नेता अशोक तिवारी ने कहा है कि उन परिवारों को भी पुनर्वास के अंतर्गत अन्यंत्र कृषि भूमि के पट्टे दिए जाएं। चंबल

अभ्यारण/ घड़ियाल परियोजना व सड़क के बीच जो गांव विस्थापन में आएंगे, उनके भी पुनर्वास की व्यवस्था की जाए । अटल एक्सप्रेस वे के दोनों ओर जो औद्योगिक गलियारा निर्मित करने की सरकार की योजना है। उससे बीहड़ के अंतर्गत रहने वाले दलित, पिछड़े, केवट समाज के लोग पूरी तरह से बीहड़ से बाहर कर दिए जाएंगे। जिनकी संख्या लाखों में होगी । उनके पुनर्वास के लिए, आजीविका के लिए जमीन के पट्टे, आवास व रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जवाबदारी प्रदेश सरकार को उठानी चाहिए। प्रदेश व केंद्र सरकार अटल एक्सप्रेस वे बनाकर चंबल के बीहड़ की 3 लाख हेक्टेयर जमीन को औद्योगिक गलियारे के नाम पर कॉरपोरेट को सौंपना चाहती है। किसान सभा का कहना है कि यह जमीन कॉर्पोरेट को नहीं दी जाए, चंबल के बीहड़ में काबिज किसानों को ही दी जाए। किसान सभा की ओर से सरकार को यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि बड़ी संख्या में विस्थापन हुआ तो जनता सड़कों पर उतरेगी।

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