मुरैना

जब तक तीनों कृषि कानून बापस नहीं होंगे जारी रहेगा आन्दोलन: यादव


लखीमपुर खीरी घटना को लेकर अस्थि कलश यात्रा आरंभ हुई। आज चंबल अंचल और ग्वालियर पहुंची।
मुरैना। भीमसेन सिंह तोमर विशेष संवाददाता लखीमपुर खीरी में शहीद हुए किसानों के मामले में संयुक्त किसान मोर्चा चंबल संभाग द्वारा मंगलवार को ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल से अस्थि कलश यात्रा आरंभ की गई जो मंगलवार की दोपहर मुरैना पहुंची और यहां प्रेस वार्ता के दौरान यात्रा का नेतृत्व कर रहे मध्यप्रदेश किसानसभा के राज्य सचिव अखिलेश यादव ने कहा कि मोदी सरकार ने देश को पूंजीपति दोस्त अंबानी एवं अडानी के हवाले कर दिया है, उन्हें देश के मजदूर, किसान और आमजन से काई हमदर्दी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह चाहे कितने भी जुल्म करें, यह आंदोलन उस समय तक चलेगा, जब तक किसानों की मांग पूरी नहीं होती और तीनों कृषि कानून वापस नहीं होते।
श्री यादव ने बताया लखीमपुर खीरी में शहीद हुए चार किसान व एक पत्रकार साथी की अस्थियों को देश की अनेकों बडी नदियों में विसर्जन करने के लिए 25 कलश तैयार कर देश भर में कलश यात्रा के रूप में भ्रमण हेतु निकाले जा रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल ग्वालियर से शुरू हुई यात्रा ग्वालियर के ग्रामीण क्षेत्रों से होती हुई मुरैना, जौरा, कैलारस एवं सबलगढ़ पहुंची। 27 अक्टूबर को यह यात्रा श्योपुर एवं शिवपुरी पहुंचेगी तथा 28 अक्टूबर को मोहना, भितरवार होती हुई दतिया जिले सहित अनेक जिलों में होते हुए इंदौर रवाना हो जाएगी। यात्रा में शामिल किसान नेताओं ने मुरैना में रेस्ट हाउस पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि लखीमपुर खीरी में विरोध प्रदर्शन करके वापस लौट रहे किसानों को मोदी सरकार के गृह राज्यमंत्री के बिगड़ेल बेटे ने गाडिय़ों से कुचल दिया। मोदी सरकार में मंत्री एवं उनके बेटे इस तरह के कृत्य कर देश में अशांति फैला रहे मोदी सरकार के मंत्री किसानों के बारे में अपशब्द बोल रहे हैं, यह ठीक नहीं है। इस दौरान किसान नेताओं ने कहा कि किसान आंदोलन जो ना सिर्फ खेती और किसानी को बचाने का संघर्ष है, बल्कि मोदी सरकार द्वारा देश की संपत्तियों को बेचने से रोकने, खत्म किए जा रहे श्रम कानूनों को बचाने, बढ़ती हुई महंगाई पर रोक लगाने तथा सब कुछ अंबानी अडानी के हवाले करके देश बेचने की मोदी सरकार की साजिश के खिलाफ आजादी बचाने का संघर्ष है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष से गांव-गांव के लोग जुड़े, ताकि ग्वालियर चंबल संभाग में भी मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ एक बड़ा जन संघर्ष तैयार हो सके और किसान आंदोलन में शहीद हुए 700 से ज्यादा किसानों के प्रति हमारी यही श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर अखिलेश यादव, जसविंदर सिंह, बलविंदर सिंह, भगवानदास सैनी, राजेंद्र सविता, कुलवंत सिंह, अमित सिंह जाट, प्रमोद श्रीवास, जेके पिप्पल, श्रीकृष्ण यादव, बैजनाथ पिप्पल सहित अनेक किसान नेता मौजूद थे।

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