मुरैना

तीनों कृषि विरोधी काले कानून संसद में वापिस लिए गए। किसान आंदोलन की जीत। एमएसपी कानून और अन्य मुद्दों के लिए संघर्ष जारी रहेगा। किसान सभा


मुरैना – विशेष संवाददाता। भीमसेन सिंह तोमर। तीनों कृषि विरोधी काले कानून लोकसभा और राज्यसभा में वापिस लिए गए।यह किसान आंदोलन की जीत है।गत 01 वर्ष से जारी किसान आंदोलन में 700 से ज्यादा किसान शहीद हो गए। किसान आंदोलन को भारी दमन का सामना करना पड़ा लेकिन उसके बाद भी किसान पीछे नहीं हटे और अंततः ऐतिहासिक किसान आंदोलन की जीत हुई। कृषि विरोधी काले कानून मोदी सरकार द्वारा लोकसभा राजसभा में वापिस ले लिए गए हैं। यह मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता अशोक तिवारी ने जारी एक वक्तव्य में कहा है। उन्होंने कहा है कि इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीदी अनिवार्य करने का कानून बनाया जाए। बिजली के निजीकरण संबंधी बिल जो लोकसभा में लंबित है, उसे वापस लिया जाए। किसानों की हत्या के षड्यंत्र में शामिल टेनी मिश्रा गृह राज्य मंत्री को बर्खास्त और गिरफ्तार किया जाए। साथ ही किसानों पर आन्दोलन के दौरान लगाए गए मुकदमे वापस लिए जाएं। जब तक किसानों की मांगे पूरी नहीं होती, तब तक किसानों का आंदोलन दिल्ली के बॉर्डर पर और पूरे देश में जारी रहेगा।
किसान नेता अशोक तिवारी ने कहा कि मुरैना जिले में अभी किसानों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही है। बाजरा की समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू नहीं हुई है। किसानों को मजबूरन 1400/ 1500 रुपए प्रति क्विंटल पर बाजरे को बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इसी तरह जिले के एकमात्र सबसे बड़े उद्योग शक्कर कारखाने को शुरू करने के बजाए, कौड़ियों के मोल 86 करोड रुपए में बेचा जा रहा है। यह क्षेत्र के विकास को अवरुद्ध करने का षड्यंत्र है। उन्होंने किसानों की उक्त समस्याओं का भी समाधान करने की मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है।
प्रेषक
अशोक तिवारी
प्रदेश उपाध्यक्ष
मध्य प्रदेश किसान सभा

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