कैलारस चुनावी हलचल पंचायत चुनाव मध्यप्रदेश मुरैना

पंचायत चुनाव 2021लोकतंत्र को संकुचित करने, ग्रामीण पूंजीवादी धुरी को मजबूत करने, ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा का वर्चस्व बढ़ाने की साजिश है।

मुरैना – किसान सभा ‌मुरैना /कैलारस विशेष संवाददाता। भीमसेन सिंह तोमर।
अभी हाल ही में स्थानीय निर्वाचन आयोग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत के त्रिस्तरीय निर्वाचन 2021 की घोषणा की है । इसमें पंच, सरपंच,जनपद पंचायत, जिला पंचायत का निर्वाचन होंगा। लगभग 3 करोड़ 90 लाख मतदाता मतदान में भाग लेंगे। यह चुनाव ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतंत्र को मजबूत करने, ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को सुनिश्चित करने, जनता की भागीदारी कराने के उद्देश्य से किए जाने चाहिए। लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने इसके विपरीत पंचायत चुनावों को भाजपा आरएसएस को ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत करने के औजार के रूप में उपयोग करने की कोशिश की जारही है। एक और निर्वाचन आयोग बसंत सिंह द्वारा पंचायत चुनाव की घोषणा की जाती है। दूसरी ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह बयान जारी कर इस तरह का प्रदर्शित करने का प्रयास करते हैं जैसे वही चुनाव करा रहे हैं। इस बयानबाजी में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी पीछे नहीं रहते हैं। वह भी राजनीतिक प्रचार के रूप में उपयोग करने वाला बयान जारी करते हैं। लेकिन सच्चाई इसके कहीं विपरीत है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अध्यादेश जारी करके 2019 में जिन 12 सौ पंचायतों के परिसीमन किया गया था उसको निरस्त करने की कार्यवाही की जाती है। आमतौर पर अध्यादेश आपातकालीन स्थिति में तात्कालिकता के आधार पर जारी किए जाते हैं। निर्वाचन जैसी प्रक्रिया में जो आगामी 5 वर्ष तक प्रभावी रहेगी अध्यादेश जारी नहीं किया जाने चाहिए था। प्रदेश सरकार द्वारा परिसीमन समाप्ति के अध्यादेश में यह उल्लेखित भी किया गया है कि यह अध्यादेश तात्कालिक ता के आधार पर जारी किया जा रहा है। इससे सरकार की मंशा स्पष्ट होती है। पहले पंचायत चुनाव वर्ष 2014 में हुए थे , उसके पश्चात 5 वर्षों में पंचायतों में के क्षेत्रों में वृद्धि होना लाजमी है। लेकिन सरकार इसे पूर्ववर्ती सरकार द्वारा की गई कार्यवाही बताकर कर अध्यादेश के जरिए निरस्त करती है। यह पूरी तरह अवैधानिक और अनुचित है। इतना ही नहीं शिवराज सिंह सरकार द्वारा चुनाव की घोषणा से पहले ही एक आदेश जारी कर आरक्षण को 2014 की स्थिति के अनुरूप रखने के निर्देश दिए हैं। आरक्षण नियमों के मुताबिक प्रति 5 वर्ष में रोटेशन के आधार पर आरक्षण परिवर्तित होते हैं। परंतु सभी नियमों को ताक पर रखकर वर्ष 2014 की स्थिति के आरक्षण को बहाल रखना पूरी तरह से अवैधानिक तो है ही लेकिन असंवैधानिक भी है तथा आरक्षण नियम के प्रावधानों का भी खुला उल्लंघन है।
पंचायत चुनावों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा अपने प्रभुत्व को मजबूत करने और ग्रामीण पूंजीवादी भूस्वामी धुरी को विस्तारित व प्रभावी बनाने की कोशिश है।

नव उदारवादी नीतियों के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने भूस्वामी, पूंजीवादी भूस्वामी, ठेकेदारों ,व्यापारियों, सूदखोरों कि एक धुरी विकसित हुई है। जो पूरे गांव की राजनीति को नियंत्रित करती है। पंचायत चुनाव के जरिए इस धुरी को विस्तारित और मजबूत करने की कोशिश भाजपा सरकार द्वारा की गई है। 2014 के आरक्षण के आधार पर पंचायत चुनाव कराने का अर्थ है कि जो जनप्रतिनिधि विगत 7 वर्षों से पंचायती संस्थाओं में काबिज हैं। जिन्होंने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और लूट को अंजाम दिया है। उन्हें दुबारा से पंचायतों में चुनवा कर लाने कोशिश है। इनमें से अधिकांश भाजपा समर्थक हैं। यह लोकतंत्र को ग्रामीण क्षेत्रों में संकुचित करने और भाजपा को और पूंजीवादी भूस्वामी धुरी को विस्तारित व मजबूत करने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है। इससे लोकतंत्र संकुचित होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में संपन्न और प्रभावशाली तबके जो भाजपा के साथ हैं उनका वर्चस्व बढ़ेगा और आम जनता की दरिद्रता, गरीबी, बेरोजगारी,भूमिहीनता ओर भी ज्यादा भी बढ़ेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतंत्र को बचाने के लिए आगे आएं।
भाजपा सरकार द्वारा सत्ता का दुरुपयोग करते हुए, निर्वाचन आयोग को बंधक बनाते हुए, जिस तरह से पुराने आरक्षण पर चुनाव कराने की घोषणा की है और चुनाव का श्रेय लेने का प्रयास किया है। यह एक तरह से लोकतंत्र को संकुचित करने की कोशिश है। एक और तो स्थानीय संस्थाओं के चुनाव 7 वर्ष बाद कराए जा रहे हैं। जबकि 5 वर्ष बाद निर्धारित समय अवधि में होने चाहिए थे। कोरोना का बहाना बनाकर चुनावों को टाला गया। जब विधानसभा के उपचुनाव कराए जा सकते हैं, अन्य चुनाव कराए जा सकते हैं। तो फिर पंचायतों के चुनाव क्यों नहीं कराए गए। बार-बार हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी चुनाव नहीं कराए गए। अब मजबूरन जब चुनाव कराना आवश्यक हो गया, तो आरक्षण के जरिए पुराने जनप्रतिनिधियों को पुनः काबिज कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में पूंजीवादी भूस्वामी धुरी को मजबूत करने भाजपा को विस्तारित करने और मजबूत करने की साजिश है। मध्य प्रदेश किसान सभा अपील करती है कि हमें जनता के बीच में इसे उजागर करने अभियान चलाने और जनता के सच्चे प्रतिनिधियों को जिताने की कोशिश हम सब लोगों को मिलकर करनी चाहिए। यही लोकतंत्र को बचाने की कोशिश है।

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