कैलारस मुरैना

मध्यप्रदेश पंचायत चुनाव 2021 संविधान का खुला उल्लंघन

मुरैना/कैलारस। भीमसेन सिंह तोमर । विशेष संवाददाता
ग्रामीण शोषक भ्रष्ट धुरी और भाजपा गंठजोड़ का वर्चस्व बढ़ाने की साजिश –
अशोक_तिवारी
🔴 मध्य प्रदेश के स्थानीय निर्वाचन आयोग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत के त्रिस्तरीय निर्वाचन 2021 की घोषणा की गयी है । इसमें पंच, सरपंच,जनपद पंचायत, जिला पंचायत का निर्वाचन होंगा। लगभग 3 करोड़ 90 लाख मतदाता , मतदान में भाग लेंगे। यह चुनाव ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतंत्र को मजबूत करने, ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को सुनिश्चित करने, जनता की भागीदारी कराने के उद्देश्य से किए जाने चाहिए। लेकिन मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा इसके विपरीत पंचायत चुनावों के जरिए संवैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। आरक्षण रोस्टर प्रणाली के आधार पर करने के बजाय वर्ष 2014 के आरक्षण को ही रिपीट करके चुनाव कराए जा रहे हैं। इतना ही नहीं इन पंचायत चुनावों को ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा आरएसएस को मजबूत करने के औजार के रूप में उपयोग करने की कोशिश की जा रही है। एक ओर निर्वाचन आयोग बसंत सिंह द्वारा पंचायत चुनाव की घोषणा की जाती है। दूसरी ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह बयान जारी कर इस तरह का प्रदर्शित करने का प्रयास करते हैं जैसे वही चुनाव करा रहे हैं। इस बयानबाजी में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी पीछे नहीं रहते हैं। वह भी पंचायत चुनाव को राजनीतिक प्रचार के रूप में उपयोग करने वाला बयान जारी करते हैं। लेकिन सच्चाई इसके कहीं विपरीत है।
🔴 मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अध्यादेश जारी करके 2019 में जिन 12 सौ पंचायतों का परिसीमन किया गया था, उसको निरस्त करने की कार्यवाही की गयी है। आमतौर पर अध्यादेश आपातकालीन स्थिति में तात्कालिक जरूरत के आधार पर जारी किए जाते हैं। निर्वाचन जैसी प्रक्रिया में जो आगामी 5 वर्ष तक प्रभावी रहेगी अध्यादेश जारी नहीं किया जाना चाहिए। प्रदेश सरकार द्वारा परिसीमन समाप्ति के अध्यादेश में यह उल्लेख भी किया गया है कि यह अध्यादेश तात्कालिकता के आधार पर जारी किया जा रहा है। इससे सरकार की मंशा स्पष्ट होती है।
🔴 पिछले पंचायत चुनाव वर्ष 2014 में हुए थे , उसके पश्चात 5 वर्षों में पंचायतों के क्षेत्रों में वृद्धि होना लाजमी है। लेकिन सरकार इसे पूर्ववर्ती सरकार द्वारा की गई कार्यवाही बताकर कर अध्यादेश के जरिए निरस्त कर देती है। यह पूरी तरह अवैधानिक और अनुचित है। इतना ही नहीं शिवराज सरकार द्वारा चुनाव की घोषणा से पहले ही एक आदेश जारी कर आरक्षण को 2014 की स्थिति के अनुरूप रखने के निर्देश दिए गए हैं। आरक्षण नियमों के मुताबिक प्रति 5 वर्ष में रोटेशन के आधार पर आरक्षण परिवर्तित होते हैं। परंतु सभी नियमों को ताक पर रखकर वर्ष 2014 की स्थिति के आरक्षण को बहाल रखना पूरी तरह से अवैधानिक तो है ही लेकिन असंवैधानिक भी है तथा आरक्षण नियम के प्रावधानों का भी खुला उल्लंघन है।
🔴 मंशा है ग्रामीण पूंजीवादी भूस्वामी धुरी की जकड़न बढ़ाना
🔴 नव उदारवादी नीतियों के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने भूस्वामी, पूंजीवादी भूस्वामी, ठेकेदारों ,व्यापारियों, सूदखोरों की एक धुरी विकसित हुई है। यह पूरे गांव की राजनीति को नियंत्रित करती है। पंचायत चुनाव के जरिए इस धुरी को विस्तारित और मजबूत करने की कोशिश भाजपा सरकार द्वारा की गई है। 2014 के आरक्षण के आधार पर पंचायत चुनाव कराने का अर्थ है कि जो जनप्रतिनिधि विगत 7 वर्षों से पंचायती संस्थाओं में काबिज हैं, जिन्होंने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और लूट को अंजाम दिया है। उन्हें दोबारा से पंचायतों में चुनवा कर लाने की तैयारी है ।
इनमें से अधिकांश भाजपा समर्थक हैं। जो नहीं थे उन्हें इस बीच कर लिया गया है यह लोकतंत्र को ग्रामीण क्षेत्रों में संकुचित करने और भाजपा को और पूंजीवादी भूस्वामी धुरी को विस्तारित व मजबूत करने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है। इससे लोकतंत्र संकुचित होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में संपन्न और प्रभावशाली तबके जो भाजपा के साथ हैं उनका वर्चस्व बढ़ेगा और आम जनता की दरिद्रता, गरीबी, बेरोजगारी,भूमिहीनता ओर भी ज्यादा बढ़ेगी।संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए आगे आएं
भाजपा सरकार द्वारा सत्ता का दुरुपयोग करते हुए, निर्वाचन आयोग को बंधक बनाते हुए, जिस तरह से पुराने आरक्षण पर चुनाव कराने की घोषणा की गयी है और चुनाव का श्रेय लेने का प्रयास किया है। यह एक तरह से लोकतंत्र को संकुचित करने की कोशिश है। एक तरफ तो स्थानीय संस्थाओं के चुनाव 7 वर्ष बाद कराए जा रहे हैं। जबकि 5 वर्ष बाद निर्धारित समय अवधि में होने चाहिए थे। कोरोना का बहाना बनाकर चुनावों को टाला गया। जब विधानसभा के उपचुनाव कराए जा सकते हैं, अन्य चुनाव कराए जा सकते हैं। तो फिर पंचायतों के चुनाव क्यों नहीं कराए गए ? बार-बार हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी चुनाव नहीं कराए गए।
अब मजबूरन जब चुनाव कराना आवश्यक हो गया, तो 2014 के आरक्षण के जरिए, पुराने जनप्रतिनिधियों को पुनः काबिज कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में पूंजीवादी भूस्वामी धुरी को मजबूत करने भाजपा को विस्तारित करने और मजबूत करने की कोशिश है। साथ ही वंचित तबकों को आरक्षण नहीं बदलने से चुनाव से बाहर करने की भी कोशिश है।
मध्य प्रदेश किसान सभा से इसका संज्ञान लिया है और जनता के बीच में इसे उजागर करने का अभियान चलाने और जनता के सच्चे प्रतिनिधियों को जिताने की मुहिम शुरू की है। यह काम सब लोगों को मिलकर करना चाहिए। यह संविधान और लोकतंत्र को बचाने की कोशिश होगी, जो सबकी चिंता का विषय होना चाहिए।

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