अम्बाह मुरैना

इस बार भगवान आदिनाथ (ऋषभ देव) का जन्म-तप कल्याणक 26 मार्च को अंबाह के सभी जैन मंदिरों मे धूमधाम से मनाया जाएगा।

 

भीमसैन सिंह तोमर पत्रकार साथी

जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म उप्र के अयोध्या नगर में हुआ था, उनके पिता राजा नाभि राय एवं माता रानी मरू देवी थीं। राजा ऋषभ देव के भरत चक्रवर्ती एवं बाहुबली आदि सौ पुत्र और ब्राह्मी एवं सुंदरी पुत्री थी। उन्होंने मनुष्य को जीवन जीने के लिए छह काम सिखाये थे, जो हैं।

असि- रक्षा करने के लिए अर्थात सैनिक कर्म

मसि- लिखने का कार्य अर्थात लेखन

कृषि- खेती करना और अन्न उगाना

विद्या- ज्ञान प्राप्त करने से संबंधित कर्म

वाणिज्य- व्यापार से संबंधित

शिल्प- मूर्तियों, नक्काशियों, भवनों इत्यादि का निर्माण।

वैदिक दर्शन में, अथर्ववेद व पुराणों कुछ ग्रंन्थो मे ऋषभदेव का वर्णन आता है | वैदिक दर्शन में ऋषभदेव को विष्णु के 24 अवतारों में से एक के रूप में संस्तवन किया गया है। भागवत में अर्हन् राजा के रूप में इनका विस्तृत वर्णन है। श्रीमद्भागवत् के पाँचवें स्कन्ध के अनुसार मनु के पुत्र प्रियव्रत के पुत्र आग्नीध्र हुये जिनके पुत्र राजा नाभि थे। राजा नाभि के पुत्र ऋषभदेव हुये जो कि महान प्रतापी सम्राट हुये। भागवत् पुराण अनुसार भगवान ऋषभदेव का विवाह इन्द्र की पुत्री जयन्ती से हुआ। इससे इनके सौ पुत्र उत्पन्न हुये। उनमें भरत चक्रवर्ती सबसे बड़े एवं गुणवान थे ये भरत ही भारतवर्ष के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट हुए।जिनके नाम से भारत का नाम भारत पड़ा |भगवान ऋषभ देव ने 1000 वर्ष तक कठोर तप कर के परम ज्ञान की प्राप्ति की थी।सौरभ जैन वरेह वाले अंबाह के अनुसार सभी अंबाह जैन मंदिरों मे भगवान आदिनाथ का सुबह महामस्तकाविषेक, पूजा विधान और शाम को महाआरती की जाएगी।

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