RTI दतिया मध्य प्रदेश

आरटीआई वेबीनार देशभर के एक्टिविस्टों को जोड़ने का एक अच्छा तरीका लेकिन ग्राउंड मीटिंग भी आवश्यक- निखिल डे

RTI से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित हुआ 96 वां राष्ट्रीय वेबिनार

वरिष्ठ समाजसेवी निखिल डे और सूचना आयुक्तों ने रखे अपने विचार

RTI कानून को प्रभावी बनाने हुआ मंथन

कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर भी जाहिर की चिंता, विसलब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने

दतिया @RBNewsindia.com>>>>>>>>>>>>> आरटीआई कानून को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किए जाने वाले राष्ट्रीय स्तर पर वेबीनार का 96 वां एपिसोड 24 अप्रैल को संपन्न हुआ। इस बीच कार्यक्रम में मजदूर किसान शक्ति संगठन के सह्संथापक एवं वरिष्ठ समाजसेवी निखिल डे एवं उनके सहयोगी आसमी शर्मा एवं कमल कुमार सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त अजय उप्रेती, मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह एवं पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने भी अपने विचार रखे।

*राजस्थान सरकार का जन सूचना पोर्टल और ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल बेहतर*

कार्यक्रम में राजस्थान से मजदूर किसान शक्ति संगठन से आसमी शर्मा और कमल कुमार ने बताया की राजस्थान सरकार के द्वारा चलाया जा रहा जन सूचना पोर्टल काफी महत्वपूर्ण है जिसमें हर विभाग की अधिकतम जानकारियों को साझा किया गया है। कार्यक्रम में कमल कुमार ने स्लाइड शो प्रजेंटशन के माध्यम से पूरे पोर्टल की बारीकियों के विषय में बताया जिसमें गरीबों के पीडीएस कंट्रोल के राशन के विषय में भी जानकारी दी गई कि कैसे प्रत्येक आवेदक को कब कितना राशन मिला उसकी पूरी जानकारी ऑनलाइन प्राप्त की जा सकती है। इसी प्रकार अन्य विभागों के बारे में भी जानकारी दी गई.

राजस्थान में ऑनलाइन आरटीआई फाइल करने की है व्यवस्था

कार्यक्रम में आगे मजदूर किसान शक्ति संगठन से आसमी शर्मा ने भी ऑनलाइन प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि राजस्थान उन कुछ गिने-चुने 5 या 6 राज्यों में सम्मिलित है जहां ऑनलाइन आरटीआई फाइल करने की व्यवस्था है लेकिन उन समस्त राज्यों में राजस्थान का स्थान सर्वोपरि आता है क्योंकि राजस्थान में ऑनलाइन आरटीआई फाइल करने में बेहतर व्यवस्था का प्रावधान दिया गया है जिसमें जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित यदि 48 घंटे के भीतर आरटीआई की जानकारी चाही गई है उसकी भी व्यवस्था अलग लिंक दे कर दी गई है। इसी प्रकार ऑनलाइन फाइल करने के अन्य साधनों के विषय में भी स्क्रीन शेयर करते हुए जानकारी दी गई। इस बीच राजस्थान से ही उपस्थित कुछ आवेदकों ने आरटीआई फाइल करने में कुछ दिक्कतों के बारे में भी इंगित किया जहां द्वितीय अपील फाइल करने में अपील नंबर प्राप्त नहीं हो पा रहा है और दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है जिसके विषय में उपस्थित विशेषज्ञों ने कहा कि वह सरकार से इस विषय में चर्चा करेंगे।

आरटीआई वेबीनार देशभर के एक्टिविस्टों को जोड़ने का एक अच्छा तरीका लेकिन ग्राउंड मीटिंग भी आवश्यक- निखिल डे

देश में चल रहे हालातों के मद्देनजर बात रखते हुए मजदूर किसान शक्ति संगठन के सह संस्थापक और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने कहा कि आज हम 100 वें नेशनल आरटीआई वेबीनार की तरफ अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह एक अच्छी पहल है और बिना रुके हुए आज इस स्थान पर पहुंचना हम सब के लिए काफी खुशी की बात है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जहां ऑनलाइन मीटिंग के माध्यम से हम देश के विभिन्न कोनों से कार्यकर्ताओं से जुड़ सकते हैं वही हमें बीच-बीच में सरकार पर दबाव बनाने के लिए संवाद भी स्थापित करने पड़ेंगे और जाकर विभाग प्रमुखों और मंत्रियों/जिम्मेदारों के साथ चर्चा करनी पड़ेगी. उन्होंने कहा यदि आरटीआई कानून आज है वह काफी मेहनत मशक्कत और सरकार पर चढ़ाई करने और संवाद करने के कारण है। हालांकि उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं की ऑनलाइन माध्यम औचित्यहीन हो गए हैं। उन्होंने कहा की ऑनलाइन माध्यम से भी हम सब को काफी लाभ प्राप्त हो रहा है और अपनी बातें देश के विभिन्न लोगों तक पहुंचा पा रहे हैं लेकिन आज आवश्यकता है की इन्हीं सब मुद्दों को लेकर एकजुट होने की और पारदर्शिता कानून के बाद सरकार जवाबदेही कानून हर प्रदेश और केंद्र सरकार के द्वारा लागू किया जाए। निखिल डे ने कहा की 100 वें आर टी आई मीटिंग में 22 मई 2022 के दिन हम सबको मिलकर एक मसौदा तैयार करना चाहिए लिखित तौर पर इसे भारत सरकार को भेजा जाना चाहिए।

सरकारें ब्लैकमेलिंग के गलत मुद्दे को लेकर पारदर्शिता कानून को दबाना चाहती हैं- विशेषज्ञ

कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञ समाजसेवी निखिल डे, पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी एवं मध्यप्रदेश के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने कहा कि वास्तव में देखा जाए तो ब्लैक मेलिंग जैसा कोई शब्द नहीं है। और यदि सरकारी योजनाएं आती हैं तो उन में अनियमितता होने के कारण आरटीआई लगाया जाना स्वाभाविक है. अतः अधिक आरटीआई लगाए जाने से कोई व्यक्ति ब्लैकमेलर की श्रेणी में नहीं आता है। सरकार को अपने कार्यों में ज्यादा से ज्यादा पारदर्शिता लानी चाहिए और धारा 4 के प्रावधानों के तहत अधिक से अधिक जानकारी पब्लिक पोर्टल पर साझा करनी चाहिए जिससे जानकारी का दुरुपयोग न हो पाए। उन्होंने कहा की पारदर्शिता को दबाने के लिए सरकारी मुलाजिम ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाते हैं जो गलत है और हम सबको मिलकर इस विषय पर काम करने की आवश्यकता है। प्रयास किया जाना चाहिए जो जानकारी आवेदकों के द्वारा मागी जा रही है वह सीधे वेब पोर्टल पर रख दी जाए जिससे किसी भी प्रकार के सवाल न उठे क्योंकि वह जानकारी ही होती है जिसको दुरुपयोग करते हुए आरटीआई को बदनाम किया जाता है। दुरुपयोग तब होता है जब जानकारी दबी रह जाती है और यदि पोर्टल में डाल दी जाएगी तो दुरुपयोग का प्रश्न नहीं उठेगा।

राजस्थान सरकार के जन सूचना पोर्टल और ऑनलाइन आरटीआई व्यवस्था को पूरे देश में लागू किया जाए- शैलेश गांधी

उधर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने पूरे मसले पर अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्थान सरकार को प्रदेश की अन्य सरकारों में अपना जन सूचना पोर्टल और ऑनलाइन आरटीआई फाइल करने की व्यवस्था की तकनीक को साझा करना चाहिए और क्योंकि यह व्यवस्था अच्छी है इसलिए यदि सभी प्रदेशों में लागू हो जाएगी तो आवेदकों को आरटीआई लगाने में दिक्कतों का सामना कम करना पड़ेगा और साथ में जन सूचना पोर्टल जैसी व्यवस्था सुनिश्चित हो जाने से धारा 4 की पालना में भी मदद मिलेगी। शैलेश गांधी ने कहा की धारा 4 के तहत जानकारियां पब्लिक पोर्टल पर रखी जाती हैं जो कि राजस्थान सरकार के जन सूचना पोर्टल के माध्यम से काफी हद तक साकार हो रहा है लेकिन यह व्यवस्था और भी अधिक दुरुस्त किए जाने की जरूरत है।


एक बार पुनः शैलेश गांधी ने धारा 8(1)(जे) और 8 एवं 9 के तहत जानकारियां आम व्यक्ति तक उपलब्ध न किए जाने संबंधी गिरीश रामचंद्र देशपांडे नामक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा की इसकी वजह से आज अधिकतर जानकारियां रोकी जा रही हैं जो बिल्कुल आरटीआई कानून की मंशा के विपरीत है और सभी को मिलकर इसका विरोध किया जाना चाहिए। एक आवेदक के प्रश्न पर शैलेश गांधी ने कहा कि जो भी व्यक्ति आरटीआई लगाकर सरकारी जानकारी प्राप्त करना चाहता है उसे अपना नाम पता और व्यक्तिगत जानकारी न प्रकाशित हो ऐसी मंशा नहीं रखनी चाहिए। एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के द्वारा साकेत गोखले के मामले पर प्रकाश डाला गया और कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद आरटीआई आवेदकों की व्यक्तिगत जानकारी को वेब पोर्टल से हटाने का निर्देश दिया गया था लेकिन उसका साइड इफेक्ट यह हुआ कि ऐसी समस्त जानकारियां व्यक्तिगत की श्रेणी में आने से उसे धारा 8 का हवाला देकर न दिए जाने की बातें होने लगी। उन्होंने कहा इन सब से होगा क्या कि जो भी जानकारी हमें आज प्राप्त हो रही है उससे हम वंचित हो जाएंगे।

उत्तर प्रदेश में अपील के निराकरण के बाद भी आवेदन लगाकर पुनर्सुनवाई का विकल्प मौजूद- अजय उप्रेती

कार्यक्रम में प्रारंभ में ही जुड़े उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती ने एक आवेदिका नीरू वार्ष्णेय के प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में सूचना आयोग में पुनः सुनवाई की व्यवस्था है. यदि कोई आदेश दे दिया गया है और आवेदक उससे संतुष्ट नहीं है तो पुनः सुनवाई और केस को दोबारा खोलने के लिए आवेदन पत्र दे सकते हैं. वसूली के मामले पर जवाब देते हुए अजय कुमार उप्रेती ने बताया कि वह संबंधित ट्रेजरी विभाग में लोक सेवकों से जुर्माने की वसूली के लिए निर्देशित करते हैं और यदि इसके बाद भी वसूली नहीं हो पाती है तो भू राजस्व संहिता जिसे आरआरसी कहा जाता है उसके तहत कार्यवाही करने के लिए निर्देशित करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कई मामले हैं जो इस प्रक्रिया के तहत चलाए जा रहे हैं और वसूली की जा रही हैं।

उत्तर प्रदेश प्रयागराज से अशोक कुमार जायसवाल ने कहा कि हम सब की इन मीटिंग का प्रभाव यह हुआ है कि पहली बार उत्तर प्रदेश में राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील की सुनवाई 90 दिन के भीतर की जा रही हैं जो काफी प्रसन्नता की बात है और इसके लिए उत्तर प्रदेश सूचना आयोग बधाई के पात्र हैं। इस विषय पर अजय कुमार उप्रेती के द्वारा बताया गया कि उन्होंने प्रारंभ से ही इस पर जोर दिया है कि उनके पास आने वाली अपीलों का निराकरण उनके पास फाइल होने के 3 माह के भीतर कर दिया जाए. सुनिधि चौधरी नामक एक आरटीआई आवेदिका के द्वारा कहा गया कि उन्होंने वारिसना/नामांतरण से संबंधित जानकारी चाही थी लेकिन उन्हें उपलब्ध नहीं हो पाई है तब उप्र सूचना आयुक्त के द्वारा बताया गया कि वह इसके लिए प्रथम अपील करें और यदि जानकारी तब भी न मिले तो द्वितीय अपील सीधे सूचना आयोग में करें और जब मामला उनके पास आएगा तो वह राजस्व सबंधी अभिलेख से संबंधित समस्त जानकारी उपलब्ध करवाएंगे।

प्राइवेट यूनिवर्सिटी और प्राइवेट संस्थान की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं- आत्मदीप

पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने बताया कि उनके कार्यकाल में रेड क्रॉस सोसाइटी से संबंधित है एक आरटीआई अपील प्राप्त हुई थी. जिस पर उन्होंने काफी रिसर्च किया था और तब पता चला की रेड क्रॉस संस्था एक संवैधानिक संस्था है जिसे संसद में बिल के तहत पारित किया गया था अतः वह आरटीआई के दायरे में आती है। लेकिन इसके पहले रेडक्रास आरटीआई के दायरे में नहीं आती ऐसा दलील स्वयं रेडक्रास के द्वारा दिया जाता था। इन्हीं प्रश्नों के जवाब में पूर्व मध्य प्रदेश सूचना आयुक्त ने कहा कि सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटी आरटीआई के दायरे में आती हैं और अन्य प्राइवेट संस्थान जैसे प्राइवेट स्कूल, नर्सिंग होम, प्राइवेट क्लीनिक, से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए उत्तरदाई सरकारी संस्थानों में आरटीआई लगाई जानी चाहिए जहां पर यह सभी प्राइवेट संस्थान अपनी जानकारी और दस्तावेज नियम के तहत प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा की जो संस्थान सरकार से अपने वार्षिक टर्नओवर का कम से कम 50% या 50 हज़ार रु जो भी अधिक हो का सहयोग प्राप्त कर रहे हैं अथवा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई डोनेशन या कोई सरकारी भूमि या कोई सामग्री जिस किसी माध्यम से सरकार से प्राप्त कर रहे हैं वह सभी आरटीआई के दायरे में आते हैं।

इस प्रकार सुबह लगभग 11:00 बजे से प्रारंभ किया गया राष्ट्रीय स्तर का 96 वां आरटीआई वेबीनार दोपहर लगभग 2:30 बजे तक चलता रहा और देश के विभिन्न कोनों से जुड़े हुए आरटीआई आवेदक और जिज्ञासुओं ने अपनी अपनी बातें रखी, प्रश्न किए और उनके समाधान पाए. कार्यक्रम का सफल संचालन पहले की भांति सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा किया गया जबकि सहयोगियों में अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह एवं छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल रहे।

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