क्राइम दतिया मध्य प्रदेश

सभी के चहेते मयंक की हत्या पुलिसकर्मी ने की

दतिया पुलिस ने किया लापता हुए बालक के अंधे कत्ल का खुलासा

हत्यारा स्वयं को बचाने हेतु अवशादी और मानसिक रोगी बता रहा है

मयंक अल्पआयु में कई लोगों का बन गया था चहेता, अपने व्यवहार व बोलने की स्टाइल से अपना बनाता था

दतिया @RBNewsindia.com>>>>>>>>>>>>>>> फरियादी संजीव सेन पुत्र नारायण दास हाल निवास पंचशील कॉलोनी दतिया निवासी ग्राम विलोनी द्वारा अपने पुत्र मयंक सेन उम्र 6 साल को किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने की रिपोर्ट थाना कोतवाली में की थी जिस पर से अप क्रमांक 236/22 धारा 363 ता ही का पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया था।

4 मई से मयंक रथयात्रा में सम्मिलित होने गया था

5 मई को दोपहर उपरांत मयंक के पिता संजीव सेंन ने अजय दाँगी, पीयूष राय व साथियों को बताया कि कल रथयात्रा में गया मयंक वापस नहीं आया। तभी इन युवाओं ने संजीव को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही और उसे साथ लेकर कोतवाली जाकर पुलिस को मयंक की जानकारी दी। साथ ही रामजीशरण राय सामाजिक कार्यकर्ता ने कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास अरविंद उपाध्याय, बाल संरक्षण अधिकारी धीरसिंह, वन स्टॉप सेंटर श्रीमती कमला साहू, चाइल्ड लाइन समन्वयक सोमेश सिंह व शिशुगृह व बालगृह संचालक चंदेल को फोन कर मयंक के बारे में जानने का प्रयास किया। किन्तु पता नहीं चल सका था। ग्वालियर चाइल्ड लाइन समन्वयक राजेंद्र सोनी को भी अवगत कराया। सोशल मीडिया पर भी मयंक के गुम होने और सूचना देकर की अपील की।

पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़ ने पतारसी हेतु स्पेशल टीम गठित की

उक्त मामले को गंभीरता लेते हुए बालक मयंक सेन की पतारसी हेतु पुलिस अधीक्षक दतिया अमन सिंह राठौड के द्वारा स्पेशल टीम का गठन किया गया तथा उक्त टीम ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य एवं एसडीओपी सुश्री प्रियंका मिश्रा के मार्गदर्शन में बालक मयंक सेन की पतारसी हेतु कार्य करना प्रारंभ किया।

मयंक प्रकरण में ग्वालियर पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही

इसी दौरान थाना झांसी रोड जिला ग्वालियर पुलिस द्वारा सूचना प्राप्त हुई की एक 6 -7 साल के अज्ञात बालक का शव विवेकानंद चौराहा झांसी रोड के पास 5 मई को सुबह के समय मिला है जिस पर थाना झांसी रोड पुलिस द्वारा मर्ग कायम कर 8/22 धारा 174 जफो पंजीबद्ध कर जांच में लिया गया। बाद में झांसी रोड थाने से संपर्क किया गया तो उक्त शब की पहचान बालक मयक सेन के रूप में हुई जिसकी किसी अज्ञात आरोपी द्वारा हत्या की गई थी।
झांसी रोड थाना प्रभारी निरीक्षक संजीव नयन शर्मा तथा उनकी टीम द्वारा की गई सतत मदद से विवेकानंद तिराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को चेक किया गया तो विवेकानंद तिराहे के पास एक काले रंग की बर्ना कार संदिग्ध अवस्था में दिखी।

सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन बनीं आरोपी तलाश में सहयोगी

हत्यारे ने अपना जुर्म कबूल किया

बाद अन्य सीसीटीवी कैमरे की फुटेज एवं अन्य तकनीकी माध्यमों तथा झांसी रोड थाना पुलिस की मदद से संदिग्ध व्यक्ति कार्यवाहक आर रवि शर्मा निवासी महलगांव ग्वालियर के घर पहुंचे जिसने पूछताछ कर बताएं कि वह कावा आर के पद पर पीटीसी तिगरा में पदस्थ हैं तथा 4 मई को दतिया गौरव दिवस की ड्यूटी हेतु दतिया आया था। जिसकी ड्यूटी पंचशील नगर के एफसीआई गोदाम के पास लगी थी उसी दौरान एक बालक उसके पास आकर बार-बार उससे पैसे की मांग कर परेशान कर रहा था तथा उसके भागने पर भी वह भाग नहीं रहा था पूछताछ पर रवि शर्मा ने यह भी बताया कि वह अक्सर विगत कई महीनों से अवशाद व मानसिक तनाव में हैं। जब बालक नहीं भागा तो रवि शर्मा ने उसे बालक को कार के पास ले जाकर उसकी गला घोट कर हत्या कर दी। तथा उसके मयंक के शव को अपनी कार में रखकर ग्वालियर ले जाकर साइंस कॉलेज के पास विवेकानंद चौराहा थाना झांसी रोड के पास फेक दिया।

ग्वालियर व दतिया पुलिस अधीक्षक, व उनकी टीमों का सराहनीय योगदान

आरोपी के स्वीकार करने पर तथा विवेचना के दौरान आए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी रवि शर्मा को गिरफ्तार कर काली वर्ना कार अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य को जप्त किया गया। उक्त कार्रवाई में थाना झांसी रोड ग्वालियर थाना प्रभारी संजीव नयन शर्मा एवं उनकी टीम के सहयोग से कोतवाली थाना निरीक्षक रविंद्र शर्मा, दुरसडा थाना प्रभारी विजय लोधी, सरसई थाना प्रभारी अजय अंबे, डीपार थाना प्रभारी वैभव गुप्ता, आकाश संगरिया , अमित ओसारे ,उनि कृष्णा शर्मा ,उनि विवेक शाक्य सीसीटीवी कंट्रोल रूम प्रभारी साइबर सेल दतिया साउनि संजीव गॉड, शिकुमार सिंह, शिवगोविंद चौबे, अनुरोध पावन, मनोज तिवारी, दिलीप प्रधान, रविंद्र यादव, सोनपाल गोस्वामी, विनोद सिंह राजावत राघवेंद्र साहू कमलेश नागर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मयंक था मुहल्ले वासियों के चहेता, पिता की गैर मौजूदगी में सभी करते थे मयंक की देखरेख,मयंक की गतिविधियों से सभी थे प्रभावित

खुशमिजाज, हंसमुख और बेहद समझदार मयंक की माँ अपनी 2 वर्षीय बेटी के साथ मजदूरी कर वापस आते समय रेल पटरी पर करते समय मौत (रेल कटिंग) हो गई थी। तब से मयंक पिता के साथ रात में घर रहता था और दिन में पिता के साथ कटिंग की छोटी से दुकान (फुटपाथ पर ठेला) पर आकर बैठा रहता था। पिता की गैर मौजूदगी में मयंक को सभी स्नेह से बिस्किट, नमकीन, कुरकुरे आदि खाद्य सामग्री देते रहते थे।


सभी का चहेता था प्यारा सा चंचल मयंक

मयंक सभी से बड़े ही मोहक अंदाज में प्यारी प्यारी बातें करता रहता था। आसपास के दुकान संचालक, अन्य आने वाले लीग भी मयंक को स्नेह करते थे। लेकिन वह चंचल, मोहक और प्यारा बच्चा अब एक कानून के रक्षक पुलिसकर्मी की दरिंदगी का शिकार हो गया और दुनियां से दूर चला गया। ऐसे भक्षक राक्षस, पिशाच को मौत की सजा सुनाई जाने के पक्षधर है।

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