अम्बाह मुरैना

अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस 18 मई पर सरकार से मांग कि प्राचीन मूर्तियों का हो संरक्षण

अंबाह। इतिहास को सहेजने का काम विश्वभर के संग्रहालय बखूबी कर रहे हैं। दुनियाभर में मौजूद संग्रहालयों के महत्‍व को देखते हुए हर साल 18 मई ‘इंटरनेशनल म्यूजियम डे’ मनाया जाता है।अगर हम किसी भी शहर या देश को एक्‍सप्‍लोर करना चाहते हैं, तो सबसे पहले उस शहर के संग्रहालय का रुख करते हैं। संग्रहालय की मदद से किसी कल्‍चर और उसके इतिहास को जानना आसान हो जाता है। यहां हमें अपनी जानकारी को बढ़ाने के लिए कई चीज़ें उपलब्‍ध होती हैं, जो इतिहास से लेकर भुगोल और विज्ञान की भी जानकारी को बहुत ही सरल माध्‍यम से हमें समझा सकते हैं।इस तरह कहा जा सकता है कि इतिहास को सहेजने का काम विश्वभर के संग्रहालय बखूबी कर रहे हैं। भारत में विशेष रुप से निशुल्क प्रवेश के साथ, लोगों के दर्शन के लिए भी आमंत्रित किया जाता है, पर आज यह दिन हमें इन संग्रहालयों के दर्शन से एक बात सामने दिखाता है कि क्या देश की संस्कृति , विरासत के संवर्धन और सुरक्षा में , हमारी सरकारें, प्रशासन क्या पूरी तरह कटिबद्ध है ।वर्धमान मंडल अंबाह के सौरभ जैन वरेह वालों ने बताया कि आज आपको कुछ ऐसे चित्र दिखाएंगे , जिन्हे देख कर आपको जरूर तकलीफ होगी। हिंदू प्रतिमा,जैन तीर्थंकरो, बौद्ध प्रतिमाओं को शो पीस बना कर म्यूजियम के बाहर लगा देना, क्या उनका पूरा सम्मान है । हिंदू देवी देवता, जैन तीर्थंकरों की प्रतिमा, अनेक संग्रहालयों में अंदर रखने के साथ, बाहर भी, खुले में इस तरह रखी हैं , कि उन पर गर्मी, सर्दी, बरसात, आंधी , तूफान से उनका संरक्षण नहीं, क्षरण होता रहा है। यह चिंतनीय है , कि इस तरफ बाहर रखी प्रतिमाओं पर किसी का ध्यान नहीं गया।

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