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जनभागीदारी से ही बाल सरंक्षण परिणामोन्मुखी होगा- शिवराज सिंह चौहान

जनभागीदारी से ही बाल सरंक्षण परिणामोन्मुखी होगा- शिवराज सिंह चौहान

आफ्टर केयर की नई नीति बने:उषा ठाकुर

सीसीएफ के राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ

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मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में बाल संरक्षण के लिए सामाजिक भागीदारी के हर संभव प्रयास सुनिश्चित किये जायेंगे।एक परिणमोन्मुखी एवं समावेशी बाल नीति के लिए चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ मिलकर सरकार आगे की कार्यनीति निर्मित करेगी।श्री चौहान ने यह बात आज प्रशासन अकादमी में सीसीएफ के राष्ट्रीय सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कही। समापन समारोह में प्रदेश की संस्क्रति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर भी मौजूद रही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों का बेहतर औऱ समग्र विकास केवल सरकारी प्रयास से संभव नही है इसके लिए समाज की व्यापक और प्रामणिक भागीदारी आवश्यक है इसलिए मैं जहां भी जाता हूँ वहां कोविड ने अनाथ हुए बच्चों से मिलने का प्रयास करता हूँ ताकि उन्हें यह अनुभूति सदैव बनी रहे कि पूरी सरकार उनके साथ परिवार भाव से पीछे खड़ी है।कुपोषण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल आंगनबाड़ी के बल पर दूर नही हो सकता है इसके लिए समाज की भागीदारी भी जरूरी है। इसलिए मैंने खिलौने एकत्रित करने का अभियान आरम्भ किया और इसके नतीजे यह हुए की भोपाल और इंदौर में ट्रकों से भरकर खिलौने जमा हो गए साथ ही करोड़ों के चैक भी लोगों ने सौंप दिए। इसी संवेदनशील भाव से हम मप्र के बचपन को खुशहाल बनाने के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन जैसे संस्थान बाल हित में काम कर रहे है और उन्हें जनभागीदारी के प्रामणिक प्लेटफार्म के रूप में खुद को समाज मे स्थापित करना चाहिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सभी कलेक्टर को निर्देश दिए है कि भिक्षावृत्ति औऱ बाल मजदूरी में संलग्न सभी बच्चों को बेहतर आश्रय औऱ उनके समग्र पुनर्वास किये जायें।

सीसीएफ के प्रस्तावों पर नीतिगत कदम उठाए जायेंगे

समारोह में मुख्यमंत्री को सीसीएफ के अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र एवं सचिव कृपाशंकर चौबे ने दो दिन के चिंतन पर केंद्रित एक ड्राफ्ट नोट सौंपा।मुख्यमंत्री ने मंच से इस ड्राफ्ट में उल्लेखित प्रमुख सुझावों पर अमल की घोषणा की।उन्होंने कहा कि इन सुझावों को नीतिगत रूप से कैसे लागू किया जाएगा इसे लेकर सरकार और सीसीएफ के उच्च अधिकारी जल्द ही बैठकर निर्णय करेंगे।

इससे पूर्व प्रदेश की संस्क्रति मंत्री उषा ठाकुर ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन के प्लेटफार्म पर जिस तरह से अखिल भारतीय प्रतिनिधित्व नजर आ रहा है उसे देखकर सुखद अनुभूति होती है और वह आशान्वित है कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में यह संगठन एक विशिष्ट पहचान भारतबोध के साथ निर्मित करेगा।सुश्री ठाकुर ने 18 साल की आयु पूर्ण कर चुके अनाथ बच्चों के लिए आफ्टरकेयर की एक समावेशी नीति के निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा 18 साल बाद बाल गृह से निकलने वाले बच्चों के लिए प्रधानमंत्री आवास एवं स्वरोजगार या कौशल विकास से जुड़े दूसरे अवसर उपलब्ध कराए जाने की दिशा में अभी भी काम किए जाने की आवश्यकता है।

फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री एवं संस्कृति मंत्री का फाउंडेशन के मंच पर स्वागत किया।समापन दिवस बाल आयोग के सदस्य दिवेन्द्र मोरे,पूर्व जज एचपी सिंह,श्री पारे,ने अलग अलग सत्रो में प्रतिनिधियों को बाल संरक्षण पर मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ कृपा शंकर चौबे ने किया आभार प्रदर्शन डा के के दीक्षित द्वारा किया गया।सम्मेलन में फाउंडेशन के करीब 15 राज्यों की भागीदारी रही। दो दिन तक 8 सत्रों में किशोर न्याय अधिनियम के विभिन्न पक्षो पर विचार विमर्श हुआ। उक्त जानकारी डॉ. के.के. दीक्षित पूर्व अध्यक्ष बाल कल्याण समिति ग्वालियर ने दी।

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