अम्बाह मुरैना

पवित्र श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना, पूजा और सेवा करने से मनुष्य को भगवान भोले नाथ की कृपा प्राप्त होती है

भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के अनेकानेक मार्ग हैं किंतु लक्ष्य एक ही होना चाहिए शिव भक्ति

उन्ही मार्गों में से एक मार्ग है

श्री महामृत्युंजय मंत्र का जप

महामृत्युंजय मंत्र के जाप का अपना एक विशेष महत्व और प्रभाव है। इस मंत्र के जाप करने से मनुष्य की बड़ी से बड़ी परेशानी हल हो जाती है। इस मंत्र के प्रभाव से मनुष्य की अकाल मृत्यु भी टल जाती है।

एक प्राचीन कथा है इसके सम्बंध में

मार्कण्डेय ऋषि का जब जन्म हुआ तो उनके माता पिता को ये ज्ञात हुआ कि इस बालक की आयु सिर्फ 16 वर्ष है और उन्होंने अपने उस पुत्र को थोड़ा बड़ा होने पर भगवान शिव की भक्ति में लगा दिया। जब उस बालक का समय पूर्ण होने को आया तो वह मार्कण्डेय वाराणसी में गोमती और गंगा के संगम स्थल पर एक शिवलिंग से जाकर लिपट गया।

कुछ ही देर में जब यमराज के दूत उस बालक को लेने आये तो वह बालक शिवलिंग को पकड़ कर रोने लगा उस बालक ने रोते हुए

यजुर्वेद के रुद्र अध्याय के एक मंत्र का जाप करना प्रारम्भ कर दिया। और भगवान शिव प्रकट होगये। मार्कण्डेय के प्राणों की रक्षा की और अखण्ड आयु का वर दे दिया।

तब से इस मंत्र का प्रभाव बढ़ गया।लोग इस मंत्र के अनुष्ठान के द्वारा भगवान शिव को प्रसन्न करने लगे।

कलियुग में महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान बहुत ही प्रभाव शाली एवं मनोकामना पूर्ण करने वाला है। इसके अनुष्ठान को योग्य अनुभवी एवं शिक्षित ब्राह्मण आचार्यों के द्वारा ही सम्पन्न कराना चाहिए। तभी पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। और प्रभु की कृपा प्राप्त होती है ” भक्त की स्वंय रक्षा करते हैं भगवान”

आचार्य पं.सुनील मिश्र(थरा)

सहायक पुजारी प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर थरा, अम्बाह

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