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डाक्टरों की तैनाती न होने से बेमतलब साबित हो रहे है जिले के आधा दर्जन पीएचसी

संत कबीर नगर
राकेश द्विवेदी की रिपोर्ट
पीएचसी केन्द्रों पर पहुंचने वाले मरीजों का फर्मासिस्ट और लेव टेक्निशियन करते है इलाज
सभी सुविधाओं के साथ दवा मौजूद होने के बावजूद पीएचसी केन्द्रों ने लोगों को नहीं मिल पा रही है समुचित स्वास्थ्य सेवा
जरूरतमंदों को नजदीक जरूरी स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए तहसील क्षेत्र में खुले आधा दर्जन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बीते काफी अरसे से डाक्टरविहीन बना हुआ है। पीएचसी केन्द्रों पर डाक्टरों की तैनाती न होने के कारण केन्द्र ग्रामीणों के लिए बेमतलब साबित हो रहे है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बार बार मांग के बावजूद जिले के विभागीय आलाअधिकारी पीएचसी केन्द्रों पर डाक्टर की तैनाती नहीं कर रहे है। विदित हो कि ग्रामीणों को नजदीक स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए पौली ब्लाक में रोसया बाजार, हैंसर ब्लाक में औराडाड़, धनघटा और डेबरी तथा नाथनगर ब्लाक में हरिहरपुर, सिक्टहा व काली जगदीशपुर , खलीलाबाद ब्लाक के बनकटिया ग्रामसभा में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र संचालित होते है। उक्त सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर फर्मासिस्ट से लेकर अन्य कई स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती भी नहीं है। उसके साथ ही सभी जरूरी सुविधाओं के अलावा केन्द्रों पर जरूरी दवाए भी उपलब्ध है लेकिन डाक्टरों की तैनाती न होने के कारण स्थानीय लोगों को समुचित स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल पा रही है। ऐसा भी नहीं है कि उक्त पीएचसी पर मरीज इलाज कराने के लिए नहीं पहुंचते है। सभी उक्त पीएचसी पर अन्य अस्पतालों की तरह रोज औसतन तीन दर्जन से अधिक मरीज भी पहुंचते है जिनका चेकअप से लेकर दवा देने तक की जिम्मेदारी केन्द्रों पर तैनात फर्मासिस्ट से लेकर लैव टेक्निशियन निभाते है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर उक्त पीएचसी केन्द्रों पर डाक्टरों की तैनाती हो जाती तो मरीजों को जहां समुचित इलाज की सुविधा प्रदान होती तो वहीं केन्द्र पर अन्य अस्पतालों की तरह हमेशा चहल पहल भी बनी रहती लेकिन डाक्टर की तैनाती न होने के कारण सभी पीएचसी हमेशा वीरान ही नजर आते है। ग्रामीण रामदीन यादव, परमेश्वर सिंह, बबलू सिंह, हरिशचन्द्र यादव, सुनील मिश्र, मनोज कुमार, महेन्द्र पाण्डेय, रेनू चौधरी, निर्मला सिंह, सावित्री यादव, मीना देवी व वीरचन्द्र आदि का कहना है कि पीएचसी केन्द्रों पर डाक्टरों की तैनाती करने के लिए स्थानीय स्तर पर तहसील दिवस से लेकर विभाग के जिलास्तरीय आलाअधिकारियों तक से व्यक्तिगत मिलकर कई बार प्रार्थनापत्र दिया गया जिसपर अधिकारियों ने पीएचसी पर जल्द डाक्टर तैनात करने का भरोसा भी दिया लेकिन हालत यह है कि उक्त सभी पीएचसी केन्द्र वर्षो से डाक्टरविहीन बने हुए है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर पीएचसी केन्द्रों पर डाक्टरों की तैनाती हो जाती तो छोटी छोटी बीमारियों के इलाज के लिए ब्लाकस्तरीय अस्पतालों तक की दौड़ लगाने से छुटकारा मिल जाता।ट ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों समेत विभाग के आलाअधिकारियों से सभी पीएसची केन्द्रों पर प्रयास कर तत्काल डाक्टरों की तैनाती कराने की मांग किया है।
तहसील के तीनों ब्लाकस्तरीय अस्पतालों में नहीं है सर्जन की तैनाती
सामान्य सर्जरी कराने के लिए जिला मुख्यालय से लेकर बस्ती और गोरखपुर का चक्कर काटने को मजबूर है क्षेत्रीय ग्रामीण
तहसील क्षेत्र के तीनों ब्लाकों हैंसर, पौली एवं नाथनगर में संचालित ब्लाकस्तरीय अस्पतालों मेंसे किसी भी अस्पताल में एक सर्जन डाक्टर की तैनाती नहीं है। हालत यह है कि क्षेत्र के जरूरतमंद छोटी छोटी सर्जरी यहां तक की फोड़ा फुन्सी तक की सर्जरी कराने के लिए जिला मुख्यालय से लेकर गोरखपुर और बस्ती का चक्कर काटने को मजबूर हो गए है। विदित हो कि सामान्य बीमारियों से लेकर गम्भीर बीमारियों का इलाज कराने के लिए तहसील क्षेत्र के ग्रामीण ब्लाकों के ब्लाकस्तरीय अस्पताल सीएचसी मलौली, सीएचसी नाथनगर व पीएचसी शनिचरा बाजार पर ही निर्भर है। उक्त सभी अस्पतालो में मिलाकर रोज औसतन हजार की संख्या में मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचते है जिसकें से भारी संख्या में मरीजों की बीमारी को ठीक करने के लिए सर्जरी की ही जरूरत पड़ती है। पूर्व में सीएचसी मलौली में डा0 ओपी सिंह से लेकर डा0 एम एस खान जैसे प्रखर सर्जन डाक्टर की तैनाती भी वर्षो तक रहीं। उस वक्त लोगों को सर्जरी कराने के लिए कहीं दूर शहरों की भागदौड़ करने से छुटकारा मिल गया था। विभागीय सूत्रों के मुताबिक सर्जन डा0 ओपी सिंह कीटट अभी भी मूल तैनाती सीएचसी मलौली में ही है लेकिन वे कहीं अन्यत्र अस्पताल में डियुटी दे रहे है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बतौर सर्जन उक्त दोनों डाक्टरों की सीएचसी मलौली में तैनाती रहने पर सामान्य से लेकर बड़ी सर्जरी भी स्थानीय सीएचसी मलौली में हो जाती थी लेकिन विभाग ने उक्त सर्जन डाक्टरों का तबादला तो कर दिया लेकिन उनके बदले दूसरे सर्जन की तैनाती आज तक नहीं की गई। ग्रामीणों ने बताया कि तीनों ब्लाकस्तरीय अस्पतालों मेंसे किसी भी अस्पताल में सर्जन डाक्टर की तैनाती नहीं है ऐसी हालत में क्षेत्र के लोगों को सर्जरी की जरूरत पड़ने पर जिला मुख्यालय से लेकर बस्ती या गोरखुपर शहर का ही सहारा लेना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों ने तहसील क्षेत्र के ब्लाकस्तरीय अस्पतालों में एक सर्जन डाक्टर की तैनाती हरहाल में तत्काल प्रयास कर कराने की मांग की है।
जिले में डाक्टर उपलब्ध होते ही पीएचसी केन्द्रों पर कर दी जाएगी डाक्टर की तैनातीः सीएमओ
तहसील क्षेत्र में संचालित आधा दर्जन पीएचसी केन्द्रों के डाक्टरविहीन होने के सवाल पर जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 हरगोविन्द सिंह ने कहा कि जिले में डाक्टरों की भारी कमी है। डाक्टरों की कमी पूरी करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है जिसमें डाक्टर की मांग की गई है। सीएमओं ने कहा कि जैसे जिले को डाक्टर मुहैया हो गए तत्काल सभी पीएचसी केन्द्रों पर एक एक डाक्टर तैनात कर दिए जाएगे। तहसील क्षेत्र में एक भी सर्जन डाक्टर की तैनाती न होने के बारे में सीएमओं ने कहा कि जब जिले में डाक्टर आएगे तो उसमें सर्जन भी होगे जिनकों ब्लाकस्तरीय अस्पतालों पर ही तैनाती दी जाएगी।

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