मध्य प्रदेश

हाइपोथायरायडिज्म रोग को त्वरित पहचान व शीघ्र उपचार से रोका जा सकता है : ड़ॉ. हेमंत कुमार जैन


दतिया। थायराइड शरीर में स्थापित शरीर की मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करने वाली प्रमुख महत्वपूर्ण ग्रंथि है।

थायराइड ग्रंथि के तीन भाग होते हैं। 2 लोब और 1 इस्थमस (दोनों लोब को जोड़ने वाला हिस्सा)
थायराइड ग्रंथि से कई महत्वपूर्ण हार्मोन्स बनते हैं। जिनमें से प्रमुख है टी 3 एवं टी 4, किसी भी कारण से जब ये हार्मोन्स नहीं बनते तब दिमाग मे स्थित पीट्यूटरी ग्रंथि TSH (थायराइड स्टिमुलटिंग हार्मोन) का उत्पादन बढ़ा देती है।और यही हार्मोन का बढ़ा हुआ स्तर हाइपोथायरायडिज्म रोग की पहचान में मदद करता है।

हार्मोन का बढ़ा हुआ स्तर हाइपोथायरायडिज्म रोग से लगभग 8 प्रतिशत भारतीय नागरिक जूझ रहे हैं। जिनमें महिलाओं का प्रतिशत 80 है। उक्त प्रतिशत अभी-अभी सहायक प्राध्यापक डॉ. हेमन्त कुमार जैन एम डी मेडीसिन मेडीकल कॉलेज दतिया के द्वारा किए गए शोध से प्राप्त हुआ है। जो कि मेडीकल जनरल एण्ड डेन्टल रिसर्च में ए स्टडी टू फाइंड आउट द क्लिनिक प्रोफाइल ऑफ हाइपोथायरायडिज्म नाम से प्रकाशित हुआ है।
उक्त शोध में 40 मरीज सम्मिलित थे जिनमें 31 महिलाएं व 9 पुरुष थे।

हार्मोन का बढ़ा हुआ स्तर हाइपोथायरायडिज्म रोग से प्रभावित मरीजों में मानसिक थकावट एवं सुस्तता, शारिरिक थकावट, बजन का बढ़ना, कब्ज की शिकायत, सैक्स न करने की इच्छा, माहवारी की अनियमितता, मांसपेशियों में दर्द, सर्दी के प्रभाव को सहन कर पाने की क्षमता में कमीं पायी गई।
हार्मोन का बढ़ा हुआ स्तर हाइपोथायरायडिज्म रोग को इन लक्षणों के आधार पर सरलता से पहचाना जा सकता है और समय पर उपचार से रोका सकता है।

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