मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश की राजनीती का चुनावी विश्लेषण

कुलदीप तिवारी की कलम से

👉  मध्यप्रदेश में इन दिनों राजनीति में गहमा गहमी देखने को मिल रही है। वंही विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने मध्य्प्रदेश में अपनी सरकार वनाई। वंही दूसरी तरफ भाजपा को हार का मुह देखना पड़ा।,लेकिन अब लोकसभा चुनाव का चुनावी बिगुल बज चुका है,एक तरफ कांग्रेस में सिंधिया के जय कार तो दूसरी तरफ कमलनाथ के तो  वंही 7वी बार विधायक बने डॉ. गोविंद के जय कारे लग रहे हैं,जब सभी के समर्थक है तो ऐसे में दिग्विजय सिंह कँहा पीछे रहने बाले थे कांग्रेस से 16 साल बाद भोपाल से चुनाव लड़ेंगे

आगर हम भाजपा की बात करें तो भाजपा मोदी के चहरे पर चुनाव लड़ेगी।वह भाजपा जो 2014 में राम मंदिर बनबाने से लेकर धारा 370 हटाने तक को लेकर सत्ता में आई।लेकिन न राम मंदिर बना और न ही 370 हटी।लेकिन राम मंदिर बना हो या न वना हो लेकिन गरीवों के जरूर मकान बनबा दिए , उज्वला योजना से गरीवों के घर में सिलेंडर पहुँचा दिए , तो वंही करोड़ों घरों को सोंचालय मुक्त कर दिया।वो बात अलग है किसान यूरिया के लिए ठोकरें खाता फिरता था।लेकिन आज किशान को यूरिया पर्याप्त मात्रा में मिल रहा है।जो कभी गरीवी हटाओ का नारा देते थे,रोटी कपड़ा ,मकान देने का वादा किया करते थे लेकिन पिछले 70 सालों में न रोटी मिली न कपड़ा मिले और न मकान,लेकिन फिर भी किसान रोटी कपड़े के लिए जद्दोजहद मेहनत करके अपना घर पालता रहा। लेकिन अव बात आती है मकान पर तो एक समय के लिए तरसता था तो मकान कँहा से बनबा सकता था।लेकिन मोदी सरकार ने आते ही करोड़ों गरीवों को मकान , सोंचालय ,घरेलू गैस तो पहुंचा दी।
लेकिन चुनाव तो राफेल ओर राममंदिर जैसे मुद्दों को लेकर लड़ा जाएगा।जिससे किसान का दूर तक कोई बास्ता नहीं हैं।
जिस तरफ किसान का वोट जाता है उसी की सरकार बनती है।गरीवी हटाओ की तरह कांग्रेस ने विजली पानी और रॉड जैसे नारे दिए थे।लेकिन इन वादों पर भी पिछले 70 सालों  कांग्रेस खरी न उतर पाई।ये वादा भी लगभग किस सरकार ने पूरा किया लगभग जनता जानती है।लेकिन चुनाव तो राफेल ओर राममंदिर पर लड़ा जाएगा।किसानों की किसे परिवाह है।किसानों के वोट से मतलव है,लेकिन किसी भी पार्टी को किसानों से मतलव थोड़े ही है।
खेर जो भी है राजनीति है।भैया सब चलता है।किसान को न तो राफेल से मतलव है न ही राम मंदिर से क्योंकि राम मंदिर बनबाना 370 हटाना एक जुमला है,वंही राफेल पर राहुल का सवाल कँहा तक जायज है जनता जान चुकी है। या तो कांग्रेस के पास चुनावी कोई मुद्दा  बचा नही है।इसलिए अपने घोषणा पत्र में asfsa जैसे कानून हटाना,देश द्रोही धारा हटाने,ओर देशद्रोहीयों की ताकत बढ़ाने जैसे मुद्दे घोषणा पत्र में रखे हैं।
वंही बात करें कश्मीर की तो कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कश्मीर से 370 न हटाने की भी घोषणा की है। वहीं बीजेपी 370 हटाने को लेकर सत्ता में आई थी।अब देखना ये है कश्मीर से asfsa कानून हटाने और धारा 370 न हटने के लिए वोट जाता है , या 370 हटने के लिए। एक पार्टी के नेता हिंदु बाहुल्य क्षेत्र से तो दूसरे मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं।महबूबा तो हद ही कर गईं उन्होंने तो कश्मीर को भारत से अलग ही करने की बात कह दी और तिरंगा झंडे को हाथ मे न पकड़ने की बात कह गईं।अच्छी बात है खाते तो भारत में है,सोंच करने कँहा जाते हैं पता नहीं। खेर बुरा न मानो राजनीति है।
केजरीवाल तो टुकड़े टुकड़े गैंग को ही समर्थन देने ही पंहुंच गए खेर करना क्या है बुरा न मानो राजनीति है ।
लेकिन इस बार मोदी को हराने के लिए गठजोड़ की राजनीती देखने को मिल रही है,जो कभी एक दूसरे के दुश्मन हुआ करते थे।बे आज एक दूसरे की गोद मे बैठे हुए नजर आ रहे हैं।मोदी को जो हराना है।
खेर जो भी है मोदी को हराओ योगी को हराओ लेकिन देश को मत हराओ।
जनता देश से प्यार करती है न कि मोदी , योगी ,राहुल से।
जनता के लिए देश सवसे ऊपर है न कि मोदी,योगी,राहुल।
खेर जो भी है बुरा न मानो राजनीती है।
अगला भाग जल्द ही।

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