ग्वालियर मध्य प्रदेश

लिगं चयन व कन्या भ्रूण हत्या के तीन चिकित्सकों को तीन-तीन वर्ष कारावास व 3-3 हजार के अर्थदंड से दण्डित

ग्वालियर। एक प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (जेएमएफसी) प्राची पटेल ने आज कन्या भ्रूण हत्या के लिए सहमति देने के एक मामले में डॉ. संध्या तिवारी, डॉ. सुषमा त्रिवेदी और डॉ. एसके श्रीवास्तव (होम्योपैथी) को दोषी ठहराया है।

—अदालत ने उक्त तीनों चिकित्सकों को तीन-तीन साल के कारावास के साथ तीन-तीन हजार रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया है।

—जेएमएफसी पटेल ने अपने फैसले में कहा कि तीनों आरोपी सुशिक्षित होते हुए भी अपनी शिक्षा का प्रयोग गलत काम में कर रहे थे. इसलिए इन्हें पीसी-पीएनडीटी एक्ट की धारा 23 में अधिकतम तीन साल की सजा दी गई है। डॉ. तिवारी और डॉ. श्रीवास्तव को नियमविरुद्ध तरीके से नर्सिंग होम चलाने के मामले में पांच-पांच हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।

—- पहला अवसर है जब पीसी-पीएनडीटी एक्ट में किसी डॉक्टर को सजा दी गई।

—- हालांकि तीनों डॉक्टरों ने आदेश के खिलाफ अपील करने की बात कहते हुए जमानत आवेदन पेश किया। डॉ. एसके श्रीवास्तव को 20 हजार और डॉ. संध्या तिवारी और डॉ. सुषमा त्रिवेदी को 5-5 हजार के निजी मुचलके पर कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया।

— गौरतलब है दिल्ली की बेटी बचाओ समिति ने मई 2009 में एक स्टिंग कर चार डॉक्टरों का चेहरा उजागर किया था। जिसके बाद कलेक्टर ग्वालियर ने प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिये थे..

महत्वपूर्ण तथ्य
इंदौर में उक्त प्रकार के दो दर्जन से अधिक मामले में 8 वर्षो से विचाराधीन होकर लंबित है। ग्वालियर न्यायालय से आज आये फैसले से इंदौर के लंबित मामलों को गति मिल सकती है।

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