गोहद भिण्ड मध्य प्रदेश

ये है गाेहद किले का राज जमीन के 10 फीट नीचे था पक्का नाला बाहर नहीं आता था पानी

  • सुरंग भी मिली, जिससे चाैथी मंजिल पर पहुचता था राजा का घाेड़ा
  • कई साल पहले इस सुरंग को किसी अधिकारी द्वारा बंद करा दिया गया था

भिण्ड -गोहद .गोहद में बेसली नदी के पास बने राजा भीम सिंह राणा के किले में पुरातत्व विभाग द्वारा की जा रही खुदाई के दौरान इस राज से पर्दा उठ गया है कि किले के महल में कितना भी पानी डालो, वह बाहर नहीं निकलता। किले में 10 फीट गहराई पर ईंट-पत्थरों से बना 2 फीट चौड़ा नाला मिला है, जो महल के चारों ओर बना है। किले के अंदर का सारा पानी इसी नाले में बह जाता है।

राजा सिंघवदेव द्वितीय ने 1600 ईसवी में किले में जल निकासी के लिए यह रास्ता बनवाया था। बता दें कि वर्ष 2007 तक गोहद के सभी शासकीय कार्यालय इसी किले में संचालित होते थे। उस समय नगर में यह चर्चा का विषय होता था कि गोहद न्यायालय भवन में कितना भी पानी डालो, उसकी एक बूंद भी बाहर नहीं निकलती है।

चाैथी मंजिल पर पहुंचाती है सुरंग
खुदाई के दौरान महल की प्राचीर पर बनी सीढ़ियाें में एक रास्ता ऐसा निकला है, जिससे राजा का घोड़ा सीधे चौथी मंजिल पर ऊपर पहुंच जाता था। बताया जाता है कि कई साल पहले इस सुरंग को किसी अधिकारी द्वारा बंद करा दिया गया था।

खुदाई में शीश महल व प्राचीन भटि्टयां भी मिलीं
खुदाई के दौरान रानी महल में एक विशेष शीश महल मिला है, जिसे 1600 ईसवी का ही बताया जा रहा है। इस किले में पानी को गर्म-ठंडा करने की पद्धति थी। इसमें हमामखाने के पास कुंड भी निकले हैं जिनके नीचे भट्‌टी बनी हुई हैं। रानियां हमामखाने में नहाती थीं। इसलिए किले के बुर्ज पर एक कुआं था, जिससे हमामखाने तक पानी के लिए लाइन बनाई गई थी।

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