भिण्ड मध्य प्रदेश

राष्ट्रसंत श्री मुरारी बापू की रामकथा का आज तीसरा दिन हनुमान जी का शील ही चरित्र हैः बापू

मोनू उपाध्याय

रावतपुराधाम आज दिनांक 23.12.2019 आज प्रातः 9:30 बजे आधुनिक युग तुलसी राष्ट्रीय संत और भारत के मानस मर्मज्ञ श्री मुरारीबापू ने पूज्य व्यासपीठ से चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा जामवन्त के रघुपतहि सुहाए, पवन तनय चरित्र सुहाय उन्होंने कहा कि अभी चिंतन के छः दिन बाकी है। जहां आप ये पांच चीजें शील, बलवान, कुल, चरित्रवान, गुरू यह देखो वहीं चरित्र उपलब्ध है। रामचरित मानस में राम, सीता, षिव, हनुमान और भरत में यही लक्षण हैं। उन्होंने कहा कि बाल्मीकि रामायण में सीता चरित्र का महत्व है। चरित्र क्या और चरित्रवान क्या ? चरित्रवान मानें व्यवहार, परमार्थ दूसरों से ऊपर उठा हुआ जीवन चरित्र माने सबका आदर प्राप्त करे। जिसमें शील हो वही चरित्रवान है अगर धन है और वह चरित्रवान होगा यह कहना असम्भव है हनुमानजी का शील ही चरित्र है रावण ने जब युद्ध में समस्त राक्षसों से कहा कि सबकी निन्दा कर लेना सबसे लड लेना लेकिन हनुमान जी की निन्दा मत करना क्योंकि हनुमान जी ही षिव का रूप है और मेरे गुरू षिव है। उन्होंने कहा चरित्रवान का दूसरा गुण बलवान होता है चरित्रवान में बहुत बल होता है अतुलित बलधामा चरित्र के तीसरे गुण कुल के बारे में उन्होंने बोलते हुए कहा कि कुल दो तरह के होते हैं। सूर्य कुल और चन्द्र कुल, चरित्र के लिए कुल का महत्व है अर्जुन को महाभारत में एक ही चिंता थी इस युद्ध के बाद कुल खत्म हो जायेगा राष्ट्र खत्म हो जायेगा चरित्र खत्म हो जायेगा। तुलसीदास रामचरित मानस में कहते हैं रघूकुल रीत सदा चल आई प्राण जाए पर वचन न जाई, चरित्र का चैथा सूत्र है चरित्रवान होना चरित्रवान होने का मतलब है आप किसी का चरित्र हनन नहीं करेंगे। अगर कोई किसी के चरित्र का हनन करे तो उसके खानदान में कुलीनता है इस पर उन्होंने संगीतमय भजन प्रस्तुति करते हुए कहा दामन पर दाग आए न आए, तूने कीचड़ उछालकर अपनी हसरत पूरी कर ली। पवन तनय के द्वारा हम चरित्र दर्षन कर रहे हैं कथा में 56 भोग लगते हैं लेकिन हम सबके लिए हरी नाम ही 56 भोग है। आज संत श्री मुरारी बापू अनन्त विभूषित पूज्य महाराज श्री रविशंकर जी (रावतपुरा सरकार) कर्मयोगेष्वर के साथ व्यासपीठ पर पहुंचे। इस अवसर पर वेद षिक्षा ग्रहण कर रहे षिक्षार्थियों ने शंख, घण्टे, घडियाल बजाकर पूज्य बापू का स्वागत किया। रामकथा की शुरूआत वेदपाठ आ नो भद्राः क्रतवो के साथ हुई। अनन्त विभूषित पूज्य महाराज श्री रविशंकर जी (रावतपुरा सरकार) कर्मयोगेष्वर ने रामकथा को आम भक्तों के बीच बैठकर सुना संतश्री मुरारी बापू ने रामकथा की शुरूआत सियाराम, सियाराम, सियाराम, सिय, सिय श्रीराम के साथ करी। इसके बाद उन्होंने हनुमान चालीसा का संगीतमय पाठ किया। उन्होंने कहा कि इस पावन रावतपुरा हनुमान जी के चरणों में प्रणाम करते हुए पवन तनय हनुमान के साथ इस स्थान के परमपूज्यनीय रविषंकर जी रावतपुरा सरकार के चरणों में प्रणाम करता हूं। यहां उपस्थित सभी पूज्य संत विद्वानगण और भक्तगणों को व्यासपीठ से मेरा प्रणाम जय श्रीराम।
इस अवसर पर दंदरौआ सरकार रामदास जी महाराज, सिद्धेष्वर पीठ झांसी के आचार्य हरिओम पाठक एवं काषी सरकार रामचरणदास एवं भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं सांसद प्रभात झा, विधायक शैलेन्द्र जैन, मुन्नालाल गोयल पूर्व मंत्री एवं पूर्व सांसद अनूप मिश्रा, विष्वहिन्दू परिषद के प्रांतीय संगठन मंत्री खगैन्द्र भार्गव, जिलाध्यक्ष भाजपा नाथू सिंह गुर्जर, उपस्थित रहे।
महाबली हनुमान का जन्म हर युग में हुआ है
उन्होंने व्यासपीठ से उपस्थित भक्तगणों को कहा कि मैं पवन तनय पवनपुत्र को केन्द्र में रखते हुए सद्गुरू सद्जन्म की कृपा से कुछ स्वातिक-त्वातिक बात करूंगा। उन्होंने कहा कि महाबली हनुमान का जन्म हर युग में हुआ है सतयुग में वो भगवान षिव के रूप में है। त्रेतायुग में हनुमान जी के रूप में है, द्वापर में भीमसेन के रूप में है और कलयुग में रामनाम का सत्संग ही हनुमान का रूप है। सतयुग के हनुमान जी की आंखे श्वेत हैं, त्रेता युग के हनुमान जी की आंखें पिंगला हैं, द्वापर युग में हनुमान जी की आंखें रक्तवरण आगजनित है और कलयुग के हनुमान जी की आंखें निर्मल गुणा अतीत हैं क्योंकि रामजी और ठाकुर जी गुणा अतीत हैं।
उन्होंने इस अवसर पर भक्तगणों को एक कहानी सुनाते हुए कहा कि एक कौआ प्यासा था उसके पास एक पेड के नीचे जग रखा था पानी उसके तल पर था कौआ बार बार चोंच डालता लेकिन पानी तक नहीं पहुंच पाता था क्योंकि पानी निम्नस्तर पर था कौए ने जग के अंदर कंकड डालना शुरू किया। पानी ऊपर आ गया। यानी जीवन का चरित्र ऊपर आ गया हमारे जीवन में भी चरित्र ऊपर नीचे होता है इसलिए रामनाम रूपी कंकड डालते रहना चाहिए जिससे हमारे जीवन का स्तर उच्च पर पहुंच जाए। राम नाम मणी, सीतामणी, चूडामणी, और मुद्रिका मणी इनमे से तीन मणी जिसके पास होगी उसकी विजयश्री और जीवन आनन्द से गुजरेगा चूडामणी और मुद्रिकामणी के बारे में कल हम आपको बता चुके है संतषिरोमणी जानकी माता सीतामणी है रामनाम हमारे लिए कलयुग के मातापिता हैं अगर हमारे साथ राम नाम की महिमा है तो हम कभी अनाथ नहीं हो सकते रामनाम जपते रहो जब तक चित में प्राण आप कलयुग में राम राम, कृष्णा कृष्णा, ऊॅ नमः षिवाय कथा का सार रामनाम है राम नाम अति पावन है। रामचरित मानस मंे मूल तो राम ही हैं। हमें यह कथा घर घर तक नहीं घट घट तक पहुंचाना है। हमारा जीवन जब ही सार्थक होगा जब हम रामकथा बार बार सुनेंगे। पूरे कथा की परम्परा गोस्वामी तुलसीदास ने रखी है और श्रवण एक भक्ति है।
गुरू का रूप अलौकिक है
उन्होंने गुरू षिष्य परम्परा पर बोलते हुए कहा कि कि हमारे अध्यात्म में विचार करने की छूट है अर्जुन ने महाभारत युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि मैं आपका सखा नहीं आपका षिष्य हूं मैं आपकी शरण में हूं। जगद्गुरू के चरणों में अर्जुन षिस्तत्व कबूल करता है। मुक्ति देने वाला महागुरू होता है जो आपकी आत्मा को अपने पास रख लेता है। इस अवसर पर उन्होंने संगीतमय प्रस्तुति में कहा रोती छोडकर मत जाना घर आया मेरा परदेषी गिद्धराज जटायु अपनी इन्द्रियां षिष्य को देता है। कबीर साहब की परम्परा में उनके षिष्य भी कबीर साहब जैसे लगते थे। उद्धव भी भगवान कृष्ण जैसे लगते थे गुरू अपना रूप षिष्य को देता है। हमारा रूप लौकिक है गुरू का रूप अलौकिक है। अलोलिकता खुषबू है। भगवान श्री राम दिव्य, प्रभू एवं गुरू है। निजामुद्दीन साहब औलिया की मजार पर जब भी कोई जाता था तब वह अपने षिष्य से कहते थे बेटा उसके सिर पर हाथ रख दे मेरे हाथ अब मेरे नहीं है उसके हाथ ही मेरे हैं गुरू की आवाज ही उसके परम षिष्य में आ जाती है। मेरे द्वारा शुरू की गई रामकथा मेरे पर ही खत्म होगी मुझे कोई परम्परा नहीं बनानी है। सरलता जितनी कठिन है उतनी कठिन दुनिया में कोई चीज नहीं है।
इस अवसर पर उन्होंने भसीन साहब का शेर क्या दुख है समुद्र को बता भी नहीं सकता आंसू की तरह भी आंख तक नहीं आ सकता उन्होंने कहा कि साठ साल तक पति पत्नी की तरह साथ रहे पर एक टेªन में सफर नहीं कर सकते क्योंकि आपस में प्रेम, मोहब्बत नहीं है मेरे हमसफर, मेरे हमसफर, किसी राह पर किसी मोड पर इस अवसर पर उन्हांेने भगवान और देवदत्त के बीच में हुए संवाद को विस्तृत रूप से भक्तगणों के बीच रखा।
रामकथा का अमृत पियो
वहीं उन्होंने कहा कि आज कल हिन्दुस्तान में अमृतम नाम की शराब आ रही है कैसा नाम है राम कथा का अमृत पियो तो तर जाओगे यह तो गड्ढे का पानी पिला रहे है मैं व्यासपीठ से किसी को शपथ नहीं दिलाऊंगा। मैं प्यार से दुलारे से कहता हूं कि ऐसा चीजें खाना पीना नहीं हैं। मेरे एक भक्त ने मुझे पत्र लिखा कि बापू सावन के दिनों में मदिरा छोड दी है मैने कहा धीरे धीरे छोड देना प्यार से छूट जाएगी। मेरा कहने का मतलब है गुरू वह जो षिष्य को विचार करने की छूट देता है। न गुरू षिष्य पर और न षिष्य गुरू पर विचार लादे।
हनुमान जी के पांच भाई थे
संतश्री मुरारी बापू ने बताया कि ब्रह्मांडपुराण में रामभक्त हनुमान की कीर्ति रामचरितमानस में भरपूर गाई गई है. पर पुराण में उनके बारे में एक बेहद गूढ़ जानकारी मिलती है. पुराण में कहा गया है कि हनुमानजी के 5 सगे भाई थे, जो विवाहित थे.
ब्रह्मांडपुराण में हनुमान जी की वंशावली के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. इसी में हनुमानजी के सगे भाइयों के बारे में जिक्र मिलता है. अपने भाइयों के बीच हनुमानजी सबसे बड़े थे. उनके अन्य भाइयों के नाम हैं- मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान, धृतिमान. उनके अन्य सभी भाई विवाहित थे और सभी संतान से युक्त थे।
उन्होंने अंत में कहा कि राम नाम का प्रभाव अमिट है राम नाम कोई सामान्य नहीं समझे। हनुमान के पास साक्षात ईष्वर है ईष्वर से बड़ा कोई ऐष्वर्य नहीं है आज कल कई तथाकथित भगवान निकल पडे हैं हनुमान जी परम भगवान है और साधू के पास ऐष्वर्य नहीं ईष्वर होता है हनुमान ने केवल राम की सेवा की है।
छत्तीसगढ की राज्यपाल आज रामकथा में शामिल होंगी
कल दिनांक 24 दिसम्बर को छत्तीसगढ की राज्यपाल महामहिम अनुसुईया उईके रामकथा में शामिल होंगी। यह जानकारी रावतपुरा धाम लोक कल्याण ट्रस्ट द्वारा दी गई।
ये हुए कथा में शामिल
रावतपुरा कथा में पूर्व सांसद अनूप मिश्रा, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रभात झा,जिलाध्यक्ष नाथू सिंह गुर्जर,सोमेश महंत,रमाकांत ब्यास,संजीव चौधरी ठेकेदार,उत्तम चौधरी कक्का आदि लोग प्रमुख रूप से मौजूद रहे ।

चप्पे चप्पे पर पुलिस रही मुस्तैद

रावतपुरा धाम पर एस.डी.ओ.पी उमेश दीक्षित के निर्देशन में चप्पे चप्पे पर पुलिस मौजूद रही जिसमे थाना प्रभारी सुधाकर तोमर,मिहोना थाना प्रभारी अमर सिंह सिकरवार, असवार थाना प्रभारी दीपेंद्र यादव,एस.आई जितेंद तोमर,एस.आई आलोक तोमर,एस.आई नवी जादौन ,सूबेदार प्रेम सिंह राठौर चप्पे चप्पे पर मौजूद रहे ।

खबर- मोंटू पत्रकार रावतपुरा सरकार

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