उत्तर प्रदेश

हिंसा के मुकदमों में किसी भी दशा में निर्दोष का न हो उत्पीड़न – डीजीपी ओपी सिंह

शिवेन्द्र सिंह सेंगर

हिंसा के मुकदमों में किसी भी दशा में निर्दोष का न हो उत्पीड़न – डीजीपी ओपी सिंह

उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हुए हिंसात्मक प्रदर्शन के आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई के कदम बढ़ाने के साथ-साथ पुलिस इस मामले में पूरी सतर्कता बरतने का प्रयास भी कर रही है। थाना स्तर पर इन मामलों में किसी निर्दोष का बेवजह उत्पीड़न न हो, इसे लेकर डीजीपी ओपी सिंह ने कड़े निर्देश दिए हैं।दरअसल, सोशल मीडिया पर हिंसात्मक प्रदर्शनों पर कार्रवाई को लेकर पुलिस के खिलाफ भी कई संदेश वायरल हो रहे हैं। सड़क पर उपद्रवियों ने पुलिस को सीधा निशाना भी बनाया है। पूरे प्रकरण को लेकर राजनीतिक दल भी सक्रिय हैं। यही वजह है कि पुलिस अपना एक-एक कदम संभालकर आगे बढ़ा रही है।डीजीपी ओपी सिंह ने सभी एडीजी जोन, आइजी/डीआइजी रेंज और एसएसर/एसपी को सीएए के विरोध में हुई घटनाओं में दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष विवेचना कराए जाने का निर्देश दिया है। कहा है कि वे अपनी सतत निगरानी में गुणवत्तापरक विवेचना सुनिश्चित कराए। यह भी देखें कि दर्ज मुकदमों में किसी भी दशा में निर्दोष व्यक्ति का उत्पीड़न न हो। साक्ष्यों का संकलन कर उपद्रवियों की गिरफ्तारी व षड्यंत्रकारियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई प्रभावी ढंग से की जाए। हर जिले में एएसपी क्राइम अथवा अन्य किसी एएसपी के नेतृत्व में कुशल विवेचकों के जरिए जांच निस्तारित की जाए।डीजीपी ने कहा कि पुलिस जांच के संबंध में किसी प्रकार की कोई शिकायत आती है तो अधिकारी उसे भी पूरी गंभीरता से देखें। डीजीपी ने चेतावनी दी कि कहीं भी गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित पुलिस अधिकारी व कर्मी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।बता दें कि सीएए के विरोध में 10 दिसंबर से अब तक विधि विरुद्ध प्रदर्शन व हिंसा के मामलों में पुलिस ने 213 मुकदमे दर्ज किए हैं और 925 आरोपितों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। पुलिस ने 5558 आरोपितों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई भी की है। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक व भड़काऊ पोस्टों के मामलों में 81 एफआइआर दर्ज कर 120 आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है।

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