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भिण्ड-हिंदुस्तान के लिए दौड़े, राष्ट्र निर्माण के लिए दौड़े, हजारों हजार दौड़े पावन खिण्ड, यहां मैराथन दौड़ने के कोई मायने नहीं : अनिल ओक

भिण्ड।। पावन खिण्ड दौड़ के आयोजन का विशाल कार्यक्रम सोमवार की सुबह भिण्ड नगर के निराला रंग बिहार मेला मैदान में आज सम्पन्न हुआ। इस अवसर मंचासीन अतिथियों में महाराज श्री 1008 चिलौंगा महंत, महाराज श्री लालताशाह , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय अधिकारी व प्रचारक अनिल ओक, पावन खिण्ड समिति के संयोजक राजेश कुशवाह मंचासीन रहे। मंचासीन अतिथियों का स्वागत शौल श्रीफल से पावन खिण्ड आयोजक समिति द्वारा किया गया। मंच कार्यक्रम का संचालन द्वय सहसंयोजक मनीष ओझा व राधेगोपाल यादव ने संयुक्त रूप से किया तथा आभार सहसंयोजक शक्ति पांडेय ने माना।

पावन खिण्ड के नाम से वीर छत्रपति शिवाजी की शौर्य गाथा में आज हजारों प्रतिभागी ने हिस्सा लेकर सहभागिता निभाई । मेला मैदान में आयोजित पावन खिण्ड दौड़ की शुरुवात मंचासीन अतिथियों द्वारा भगवा पताका लहरा कर की गई। हजारों प्रतिभागियों ने महापुरुषों के नारे लगाये, वंदेमातरम, भारत माता की जय , जय शिवा सरदार की, जय राणा प्रताप की, हिन्दू वीर कैसा हो वीर शिवाजी जैसा हो, हर हर महादेव के जयकारे नारे लगाते हुए चार किलोमीटर की यह दौड़ लगाई। आज की पावन खिण्ड दौड़ मेला मैदान से प्रारंभ होकर महावीर गंज, गोल मार्किट, सदर बाजार, परेड चौराहे, पुस्तक बाजार, बेटी बचाओ चौराहे, अटेर रोड, हनुमान मंदिर, बम्बा पुलिया, गोविंद नगर , इंदिरा गांधी चौराहे से जाकर निराला रंग बिहार में सम्पन्न हुई।

आयोजक समिति द्वारा पावन खिण्ड दौड़ के 100 प्रतिभागियों को लकी ड्रा के माध्यम से चयन कर सम्मान पुरुस्कार वितरित किये, साथ ही दौड़ में शामिल रहे सभी प्रतिभागियों को प्रशंसा प्रमाण पत्र भी बांटे गये । यहाँ एक मुस्लिम बालिका आरिष खान का भी लकी ड्रा में नाम खुला जिसे संतो द्वारा सम्मान पुरुस्कार दिया गया।

मुख्य वक्ता के रूप में पधारे राष्ट्रीय स्वयंसेवक के अखिल भारतीय पदाधिकारी प्रचारक श्री अनिल जी ओक ने वीर छत्रपति शिवाजी की शौर्यगाथा का वर्णन करते हुए कई प्रसंग सुनाये उन्होंने बताया कि पावन खिण्ड दौड़ क्यों समाज मे आयोजित हो रही हैं । उन्होंने बताया कि
शिवाजी की सेना के तीन सौ सैनिकों ने 7 घंटे तक मुगल सेना के 4000 सैनिकों को रोक कर रखा ताकि स्वराज्य की स्थापना करने वीर छत्रपति शिवाजी जीवित रह सकेंगे। उस युद्ध में इन सैनिकों के शरीर के अंदर पचास से 60 से 70 घाव के झख़्म खाकर बुरी तरह से लहुलहान हो गए लेकिन फिर भी वह अपने मोर्चे पर डटे रहे और जब तक शिवाजी ने विशाल गढ़ के किले से तोप को नहीं चला दिया तब तक वाजीराव व उन्होंने 4000 मुगल सैनिकों को तनिक भी आगे नहीं बढ़ने दिया । जब तक उनके कानों में वहां से शिवाजी ने तोप का गोला दागा और तोप चलने की आवाज आई तब जाकर इन तीन सौ सैनिकों ने अपनी तलवार छोड़ी और अपनी जान दे दी । हमारे लिए मैराथन दौड़ यहां कोई मायने नहीं रखती,अगर हम दौड़ेंगे तो सिर्फ पावन उद्देश्य लिये हो, दौड़ेंगे तो देश के लिए हम दौड़ेंगे । दौड़ना है तो पावनखिंड दौड़ दौड़ेंगे न कि मैराथन…… मैराथन वाला दौड़ा लड़ाई लड़ने के बाद, विश्राम करने के बाद दौड़ा जबकि पावनखिंड वाले 40 किलोमीटर दौड़ने के बाद लड़ाई लड़े, लड़ाई वो घनघोर जंगल ,दलदल, जंगली जानवरों के बीच 12 किलोमीटर की घोड़ा खंड स्थान पर हुए भीषण संग्राम के बीच कुल 66 किलोमीटर की पावन खिण्ड दौड़ दौड़े, मैराथन वाला दौड़ा लड़ाई लड़ने के बाद थोड़ा विश्राम करने के बाद सूचना देने दौड़ा, मैराथन वाला खाली हाथ दौड़ा संदेश पहुंचाने के लिए दौड़ा वहीं पावनखिंड वाले पांच किलो की तलवार व दस किलो की ढाल साथ में लेकर दौड़े। मैराथन वाला विजय की सूचना देने दौड़ा लेकिन पहुंच कर ही हार्ट फेल से जा मरा परन्तु पावनखिंड के दौड़े तीन सौ सैनिकों की मौतों पर स्वराज्य की स्थापना करने के लिए दौड़े,अब जो
हिंदुस्तान के लिए दौड़ें उनकी दौड़ दौड़नी चाहिए या फिर मैराथन ?

मुस्लिम लीग नाम की पार्टी ने आजादी के बाद मुसलमानों के लिए पाकिस्तान बनवा लिया तो अब हिंदुओं के लिए कौन सा देश बचा ?

पाकिस्तान में खौफ के साए में जी रहे हैं अल्पसंख्यक

श्री अनिल ओक ने कहा कि विभाजन के समय पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं, सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों पर भयानक अत्याचार किए गए। इस दंश को सबसे ज्यादा हमारे अपनों ने ही भुगता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर यह अत्याचार आज भी चल रहे हैं और आज भी वहां ये लोग सुरक्षित नहीं हैं, खौफ के साये में जी रहे हैं। वहां ननकाना साहिब पर पथराव जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हो रही हैं। मियां मिट्ठू जैसे कट्टरपंथी लोग हजारों बेटियों का धर्मांतरण करा रहे हैं। श्री ओक ने कहा कि सन 1947 में विभाजन के समय पाकिस्तान में 23 प्रतिशत हिंदू, सिख और अन्य अल्पसंख्यक थे, लेकिन आज उनकी संख्या घटकर 2 प्रतिशत से भी कम रह गई है। बाकी लोग या तो मार दिये गए, उनका धर्मांतरण करा दिया गया या फिर वे भागकर भारत आ गए। सीएए में इन्हीं लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है । सीएए में गलत क्या है ?

इस अवसर पर जिले भर से वरिष्ठ समाजजनों ने पावन खिण्ड दौड़ में शिरकत की , प्रमुख रूप से सांसद श्रीमती संध्या राय, पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य, पूर्व विधायक मुकेश चौधरी, मुन्ना सिंह भदौरिया, पूर्व महिला आयोग की अध्यक्षा कृष्णकांता तोमर, पूर्व विद्यायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह, अम्बरीष गुड्डू लहार, के अलाबा समाज के वरिष्ठ बुद्धिजीवी, पत्रकार,,क्षत्रशक्ति एवं मातृशक्ति मौजूद रही।

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