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दवाई का सैंपल लेकर जांच करवाएं और धारा 2(जे) के तहत आरटीआई लगाएं – राहुल सिंह, सूचना आयुक्त मप्र

दतिया/ रीवा @RBNewsindia.com>>>>>>>>स्वास्थ्य सुविधाओं पर RTI कैसे लगाएं विषय पर आयोजित हुआ 23 वां राष्ट्रीय वेबीनार// सूचना आयुक्त राहुल सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुआ कार्यक्रम// पूर्व सीआईसी शैलेश गांधी, एसआईसी आत्मदीप, RTI एक्सपर्ट और सामाजिक कार्यकर्ता भास्कर प्रभु सहित डॉक्टर्स और समाजसेवी रहे विशिष्ट अतिथि।

वर्तमान समय सूचना क्रांति का समय है। एक तरफ जहां कोरोना जैसी महामारी ने पूरे संसार को अवरुद्ध कर दिया है वहीं दूसरी तरफ नेटवर्किंग के दौर में आपस के कम्युनिकेशंस और जानकारियों का आदान प्रदान करने की प्रक्रिया सोशल मीडिया के माध्यम से आसान हो गई है। भले ही कोरोनाकाल में आपसी मेल मिलाप और फिजिकल मीटिंग का दौर कम हो गया हो लेकिन इंटरनेट के माध्यम से वर्चुअल मीटिंग से लोगों का जुड़ाव बढ़ गया है।

*हेल्थ केयर सेवाओं में आरटीआई कैसे लगाएं विषय पर 23 वें जूम मीटिंग वेबीनार का हुआ सफल आयोजन*

इस बीच दिनांक 29 नवंबर 2020 को प्रत्येक रविवार सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक आयोजित होने वाले ज़ूम मीटिंग वेबीनार का आयोजन किया गया। इस आयोजन में कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने किया एवं विशिष्ट अतिथि के तौर पर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप, माहिती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक भास्कर प्रभु, छत्तीसगढ़ रायपुर से हेल्थ केयर सेवा में आरटीआई लगाने का विशेष अनुभव रखने वाले देवेंद्र अग्रवाल, रीवा संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल से साइकाइट्रिक विभाग के डॉक्टर धीरेंद्र मिश्रा एवं पीडियाट्रिशियन विभाग के डॉक्टर संतोष सिंह उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में संपूर्ण भारत से कार्यकर्ताओं ने सहभागिता निभाई और अपने अपने अनुभव शेयर किये। मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, नई दिल्ली, उत्तराखंड, आदि राज्यों के कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में सम्मिलित होकर अपनी अपनी बातें रखी।

कार्यक्रम का संयोजन प्रबंधन एवं समन्वयक अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता नित्यानंद मिश्रा, शिवानंद द्विवेदी, शिवेंद्र मिश्रा, अंबुज पांडे द्वारा किया गया।

*लोग स्वस्थ हैं तो देश विकास करेगा -सूचना की तो राहुल सिंह*

स्वास्थ्य के प्रति विशेष तौर पर जागरूक रहने वाले और प्रतिदिन नियमित तौर पर हेवी एक्सरसाइज करने वाले मध्य प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने मीटिंग के दौरान अपना मत रखते हुए कहा कि स्वास्थ्य हर व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए साथ में हमारे आसपास कैसी हेल्थ केयर सेवाएं मिल रही है, उस पर भी निरंतर निगरानी रखनी चाहिए। सूचना का अधिकार आमजन का अधिकार है इसलिए इस अधिकार का प्रयोग कर स्वास्थ्य सेवाओं की समस्त जानकारी निकालना चाहिए और यदि कहीं अनियमितता अथवा भ्रष्टाचार परिलक्षित होता है तो उसके विषय में कार्यवाही करवानी चाहिए। उन्होंने कहा की स्वस्थ बच्चे से ही स्वस्थ समाज का निर्माण होगा।

*आरटीआई लगाए बिना दोषियों में सुधार नहीं होगा -राहुल सिंह*

सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा की आवेदनकर्ता और जागरूक आरटीआई एक्टिविस्ट हॉस्पिटल, दवाएं, नर्सिंग होम, मेडिकल स्टोर, अन्य मेडिकल सुविधाएं आदि विषयों पर सीएचएमओ और स्वास्थ्य विभाग में आरटीआई लगाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं की कोई हॉस्पिटल निर्धारित मापदंड के हिसाब से पंजीकृत है और क्या-क्या, किस प्रकार की हेल्थ केयर सुविधाएं उपलब्ध करवा रहा है। मेडिकल स्टोर और नर्सिंग होम क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध करवा रहे हैं और किन-किन मापदंडों पर कार्य कर रहे हैं, कितनी फीस ले रहे हैं, जो डॉक्टर कार्य कर रहे हैं वह सब पंजीकृत हैं अथवा नहीं आदि प्रकार की जानकारियां आरटीआई लगाकर प्राप्त की जा सकती है।

*दवाई का सैंपल लेकर जांच करवाएं और धारा 2(जे) के तहत आरटीआई लगाएं -सूचना आयुक्त राहुल सिंह*

सूचना आयुक्त सिंह ने बताया कि आरटीआई की धारा 2(जे) के तहत किसी भी कार्यस्थल का निरीक्षण करने एवं उसका सैंपल लेने के लिए प्रावधान होता है जिसमें धारा 2(जे)(3) के तहत किसी दवा अथवा मेडिकल फैसिलिटी से संबंधित इंस्ट्रूमेंट आदि का सैंपल लिया जा सकता है और सैंपल लेकर उसकी रजिस्टर्ड इन्वेस्टिगेटिंग संस्थान में जांच करवाई जा सकती है। इस प्रकार यदि हमारे गांव में सरकार द्वारा किस प्रकार की दवा उपलब्ध करवाई जा रही है एवं उसकी गुणवत्ता क्या है तथा साथ में जो मेडिकल स्टोर खुले हुए हैं उनमें कैसी दवा और व्यवस्था उपलब्ध करवाई जा रही है इसकी जानकारी आरटीआई के माध्यम से ली जा सकती हैं और उसका निरीक्षण किया जा सकता है, दवा का सैंपल लिया जा सकता है और जांच करवाई जा सकती है जिससे अनियमितता और गड़बड़ी करने वाले लोग सचेत होंगे और समाज में काफी सुधार होगा।
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*मेडिकल के साथ-साथ हेल्थ एक सामाजिक मुद्दा भी है -डॉक्टर संतोष सिंह*

संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल रीवा के पीडियाट्रिशियन डॉक्टर संतोष सिंह ने बताया की हेल्थ एक मेडिकल इशू तो है ही साथ में एक सामाजिक मुद्दा भी है। डॉ सिंह ने कहा कि ब्लॉक स्तर और स्थानीय निकाय स्तर पर सरकार द्वारा उपलब्ध की जा रही हॉस्पिटल फैसिलिटी का सही प्रकार से उपयोग न होने के कारण जिले और संभाग स्तर पर बड़े अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के ऊपर ओवरबर्डन बढ़ता जा रहा है जिसकी वजह से बड़े अस्पतालों और बड़े डॉक्टरों को जिन विशेष कार्यों के लिए रखा गया है वह कार्य न किया जाकर बहुत छोटे-छोटे बीमारियों सर्दी जुखाम दर्द बुखार दस्त का इलाज करना आदि मुद्दों पर भटकाव हो जाता है जो कि चिंताजनक है। सबसे पहले आरटीआई कार्यकर्ताओं को अपने स्थानीय निकाय स्तर पर किस प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध है और वह हेल्थ फैसिलिटी कैसे काम कर रही है इस पर काम किया जाना चाहिए एवं जानकारी निकाल कर सुधार करवाया जाना चाहिए। कुपोषण विषय पर चर्चा करते हुए डॉक्टर संतोष सिंह ने बताया कि अमूमन समाज में नवजात बच्चे और बच्चियों में भेद किया जाता है जिसकी वजह से नवजात बच्चियों का पोषण सही तरीके से न हो पाने के कारण उनके आगे के जीवन में मेडिकल कॉम्प्लिकेशंस डेवलप हो जाते हैं। इसलिए समाज में कुरीतियों को स्थान नहीं देना चाहिए और सबको समान रूप से पोषण उपलब्ध होना चाहिए। यदि बच्चे स्वस्थ रहेंगे तभी एक अच्छे समाज का निर्माण होगा।

*दुग्ध उत्पाद को छोड़कर अनाज पर जोर देना आवश्यक – डॉक्टर संतोष सिंह*

डॉक्टर संतोष सिंह ने बताया कि अमूमन 6 माह से अधिक के बच्चों को समाज में पूर्णतया दुग्ध उत्पाद पर केंद्रित कर दिया जाता है और दूध और दूध से बने हुए पदार्थ खिलाए जाते हैं जिसे एनिमल प्रोटीन भी कहते हैं। जब बच्चा ज्यादा एनिमल प्रोटीन खाता है तो उसमें डाइजेशन से संबंधित और अन्य समस्याएं पैदा होने लगती है इसलिए समाज में लोगों को चाहिए कि 6 माह और इसे अधिक बच्चों को अनाज पर आधारित भोज्य पदार्थों पर ज्यादा जोर देना चाहिए क्योंकि हमारा शरीर इसी पर आधारित है न कि एनिमल प्रोटीन पर।

*बच्चों के हृदय में छेद से संबंधित उपचार का पूरा रैकेट बन चुका है*

हेल्थ केयर सेवाओं पर प्रकाश डालते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने उपस्थित डॉक्टर और विशेषज्ञों से जानना चाहा कि वह इस पर प्रकाश डालें कि सरकार द्वारा कौन-कौन सी ऐसी योजनाएं है जो पब्लिकली फोरम पर डिस्प्ले की जाती हैं जिसे वेबपोर्टल आदि के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।
इस बीच सूचना आयुक्त ने अपने डॉक्टर मित्र से साझा किए गए अनुभव का हवाला देते हुए बताया कि दिल्ली में कई ऐसे संस्थान है जहां पर बच्चों के दिल में छेद को लेकर जो सर्जरी की जाती है उसमें पूरा रैकेट काम करता है और कई बार ऐसे बच्चों का भी ऑपरेशन कर दिया जाता है जिन्हें किसी प्रकार के ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती है और सरकारी तंत्र से पैसे भी खा लिए जाते हैं। सूचना आयुक्त ने बताया कि ऐसे रैकेट के विरुद्ध भी कार्य करने की आवश्यकता है और आरटीआई एक्टिविस्ट आरटीआई लगाकर इस सब की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

*नशे की लत एक मानसिक बीमारी है जिसका इलाज किया जा सकता है -डॉक्टर धीरेंद्र मिश्रा*

इस बीच मीटिंग में उपस्थित कुछ आवेदकों के द्वारा यह पूछा गया कि जो लोग शराब गांजा कोरेक्स और नशीली गोलियों के शिकार हो गए हैं उनके लिए सरकार के द्वारा और मेडिकल फैसिलिटी के द्वारा क्या प्रयास किए जा रहे हैं? इसका जवाब देते हुए संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के साइकेट्रिक विभाग के डॉ धीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि एसजीएमएच हॉस्पिटल में एक डीएडिक्शन सेंटर खोला गया है जिसमें उपचार की पूरी व्यवस्था है और डॉक्टर इस पर समय-समय पर इसका प्रचार प्रसार कर जानकारी मुहैया कराते रहते हैं। डॉ मिश्रा ने बताया कि नशे की लत एक मानसिक बीमारी है और एक सामाजिक समस्या भी है जिसका इलाज किया जा सकता है और इससे निजात पाई जा सकती है लेकिन इसमें नशे की गिरफ्त में फंसे हुए व्यक्ति और उसके परिवार का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण होता है।
हॉस्पिटल में एक निश्चित समय अंतराल तक भर्ती होकर इलाज करवाए जाने के बाद इससे निजात पाई जा सकती है। मिश्रा ने बताया कि व्यक्ति सबसे पहले शराब की लत पकड़ता है फिर महंगा पड़ता है तो गांजा पीने लगता है और फिर कोरेक्स और नशे की गोली। इस प्रकार नशे की गिरफ्त में फंसा हुआ व्यक्ति उस से निकल नहीं पाता जिसके लिए इलाज ही समाधान होता है।

*आयुष्मान कार्ड से गरीब व्यक्ति को उपलब्ध हुई है स्वास्थ्य सुविधाएं -डॉक्टर धीरेंद्र मिश्रा*

डॉक्टर धीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हेल्थ फॉर ऑल जिसमें आयुष्मान योजना है जिसके माध्यम से गरीबों और मिडिल क्लास लोगों का चयन कर उन्हें आयुष्मान कार्ड जारी किए जा रहे हैं और सरकारी अस्पतालों, कुछ विशेष प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त में रुपए 50 हज़ार तक प्रतिवर्ष स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है इससे गरीबों को काफी राहत मिली है। इस योजना में गरीब और मिडिल क्लास के लोगों को काफी लाभ हुआ है और सभी को अपना आयुष्मान कार्ड अपनी पंचायत स्तर एवं स्थानीय निकाय में जाकर बनवा लेना चाहिए और साथ में अस्पताल में भी यह सुविधा उपलब्ध रहती है जिसका लाभ लिया जा सकता है और अपने-अपने कार्ड बनवा कर मेडिकल सुविधाओं का लाभ लिया जा सकता है।

*जिले में कितना फंड निर्धारित हुआ है इसकी जानकारी जिला स्वास्थ्य समिति के पास रहती है – डॉक्टर मिश्रा*

स्वास्थ्य सुविधाओं में आरटीआई से जुड़े हुए प्रश्नों का जवाब देते हुए मनोविज्ञान विभाग के डॉ धीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि मेडिकल फैसिलिटी से संबंधित ज्यादातर जानकारी प्रदेश की वेबसाइट में उपलब्ध रहती है। यह जानकारी प्रत्येक जिले में जिला स्वास्थ्य समिति के माध्यम से भी प्राप्त की जा सकती है जिसके विषय में सूचना का अधिकार आवेदन संबंधित सीएमएचओ कार्यालय में भी लगाया जा सकता है। डॉ मिश्रा ने बताया की कोरोना काल के दौरान मध्य प्रदेश में लगभग 18 सौ करोड़ का बजट आवंटित किया गया है जिसकी जानकारी पोर्टल में उपलब्ध है।। सीएमएचओ कार्यालय में आरटीआई लगाकर एवं जिला स्वास्थ्य समिति के पास कितना फंड आता है इस फंड का क्या उपयोग होता है कितने कोविड-19 सेंटर बनाए गए हैं? प्रत्येक कोविड-19 में मरीजों के लिए क्या-क्या व्यवस्था की गई है? फण्ड का सही तरीके से उपयोग हो पा रहा है अथवा नहीं हो पा रहा है? क्या क्या स्वास्थ्य सुविधाएं जिले में उपलब्ध हैं? इन सब की जानकारी जिला स्वास्थ्य समिति से प्राप्त की जा सकती है। डॉक्टर मिश्रा ने बताया की सरकार के द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर काफी फंड जारी किया जाता है।

*आरटीआई लगाकर स्वास्थ्य विभाग का वार्षिक प्रतिवेदन प्राप्त करें – देवेंद्र अग्रवाल*

छत्तीसगढ़ से आरटीआई एवं स्वास्थ्य सुविधाओं में रुचि रखने वाले देवेंद्र अग्रवाल ने बताया की स्वास्थ्य विभाग में आरटीआई लगाकर हर जिले से संबंधित वार्षिक प्रतिवेदन प्राप्त किया जा सकता है जिससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस किस प्रकार के कार्यों में सरकार के द्वारा कार्य किया गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं का एक बेसिक डाटा प्राप्त हो जाता है जिससे आगे की परतें खुल जाती हैं। क्लीनिक इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के द्वारा बहुत सी बातें स्पष्ट की गई है कि कोई मेडिकल स्टोर अथवा क्लीनिक खोले जाने पर उसके मेडिकल कचरा का डिस्पोजल किस प्रकार से होगा? उन्हें क्या-क्या सुविधाएं मुहैया रहेंगी? और किस प्रकार से इनकी फंक्शनिंग रहेगी यह सब बातें क्लीनिक इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के माध्यम से समझी जा सकती हैं। आरटीआई लगाकर सीएचएमओ कार्यालय अथवा सीडीए कार्यालय में यह जानकारी प्राप्त की जा सकती है कि किसी जिले में कितने पंजीकृत अस्पताल हैं? कितने पंजीकृत क्लीनिक हैं? एवं कितने मेडिकल स्टोर है?

आयोजित वेविनार में दतिया से डॉ. रामजीशरण राय राज्य स्तरीय मुख्य प्रशिक्षक, मेंटरिंग ग्रुप फ़ॉर कम्युनिटी एक्शन मध्यप्रदेश, सोशल एक्टिविस्ट ने समुदाय आधारित निगरानी की जानकारी के साथ ही एन पी ए नॉन प्रेक्टिस एलाउंस पाने वाले चिकित्सकों की सूची सूचना के अधिकार के तहत विभाग से मांगने व उन पर सत्यापन करते हुए पैरवी करने पर जोर दिया।

*दवा कहां खरीदना है यह हॉस्पिटल अथवा डॉक्टर फ़ोर्स नही कर सकता*

देवेंद्र अग्रवाल ने बताया कि कोई भी अस्पताल अपने अस्पताल परिसर में संचालित मेडिकल स्टोर से ही दवा लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है। यह हर व्यक्ति का अपना अधिकार होता है कि वह कहां से दवा खरीदे और यदि कोई अस्पताल इस प्रकार से आप को बाध्य करता है तो आप एनएपीपीए में शिकायत कर सकते हैं। देवेंद्र अग्रवाल ने कहा कि ज्यादातर जानकारी धारा 4 के तहत वेब पोर्टल एवं अन्य माध्यमों से साझा की जानी चाहिए लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही हैं जिसकी वजह से आम जनता को भटकना पड़ रहा है। उक्त जानकारी वेविनार के संयोजक शिवानंद द्विवेदी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता जिला रीवा मध्य प्रदेश ने दी।

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