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लोकायुक्त में शिकायत करते समय सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी उपयोग करें- ADPO सचिन द्विवेदी

दतिया/ रीवा @RBNewsindia.com>>>>>>> आरटीआई मीट – ADPO सचिन द्विवेदी ने बताया लोकायुक्त में शिकायत कैसे करें// किन बातों का रखें खयाल लोकायुक्त में शिकायत के वक्त// देश के विभिन्न हिस्सों से लोगों ने जाना बारीकियां और बतायीं समस्याएं।

प्रत्येक गुरुवार को आयोजित होने वाले थर्सडे आरटीआई मीट वेबीनार में आरटीआई और लोकायुक्त विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें रीवा से सहायक अभियोजन अधिकारी सचिन द्विवेदी, अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता नित्यानंद मिश्रा एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने भाग लिया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, नई दिल्ली, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, गुजरात आदि राज्यों से आरटीआई कार्यकर्ता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों ने भाग लिया।

*लोकायुक्त में शिकायत कैसे करें विषय पर सहायक लोक अभियोजक ने दी जानकारी*

सामान्यतया देखा गया है कि हममें से ज्यादातर लोग सूचना का अधिकार आवेदन लगाकर भ्रष्टाचार और अनियमितता से संबंधित जानकारी और दस्तावेज हासिल कर लेते हैं लेकिन फिर उस दस्तावेज का क्या किया जाना है और उसके आधार पर शिकायत कैसे करें यह सबको पता नहीं रहता है। इस विषय पर लोकायुक्त के वकील एवं जिला रीवा के सहायक लोक अभियोजन अधिकारी सचिन द्विवेदी ने बताया की शिकायत करते समय बारीकियों का ध्यान रखा जाता है और शिकायतकर्ता का नाम, शिकायत किस विषय में की जा रही है, शिकायत के महत्वपूर्ण बिंदु और शिकायत से जुड़े हुए तथ्य विधिवत लिपिबद्ध कर शिकायत की जानी चाहिए। साथ में यदि किसी विशेष व्यक्ति अथवा भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायत की जा रही है तब उसमें नोटराइज्ड हलफनामा प्रस्तुत किया जाना चाहिए जो कि लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू की शिकायत में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि शिकायत तथ्यात्मक प्रस्तुत नहीं की जाती है तो आगे चलकर शिकायत रिजेक्ट कर दी जाती है।

*यदि शिकायत के बाद लोकायुक्त भी संज्ञान न ले तो क्या करें?*

इंजीनियर फतेह चंद गुलेरिया ने जानना चाहा कि कई बार लोकायुक्त शिकायत के बावजूद भी कार्यवाही नहीं करते हैं और पेंडेंसी बढ़ती जाती है इसके लिए विभाग ही जिम्मेदार होता है। इस पर एडीपीओ सचिन द्विवेदी ने बताया की लोकायुक्त के पास पर्याप्त वर्कफोर्स न होने की वजह से यह समस्या उत्पन्न होती है। वही गुड़गांव से महेंद्र कुमार ने बताया कि मेदांता अस्पताल में भ्रष्टाचार परिलक्षित हुआ था जिसके बाद विशेष न्यायालय गठित की गई थी लेकिन बिना किसी निर्णय दिए ही न्यायालय स्थगित हो गई। इस पर एडीपीओ ने बताया कि अमूमन ऐसा होता नहीं है क्योंकि न्यायालय गठित होने के बाद अपना निर्णय देकर के ही हटाई जाती है।

एडीपीओ ने बताया यदि लोकायुक्त में शिकायत के महीनों बाद भी कार्यवाही न हो उस स्थिति में संबंधित जिला न्यायालय में लोकायुक्त एडीजे स्पेशल कोर्ट के समक्ष मामले से संबंधित परिवाद दायर किया जा सकता है।

*ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त में वर्षों से पेंडिंग पड़े हैं मामले*

कार्यक्रम में देश के विभिन्न कोनों से अपनी सहभागिता देने आए आरटीआई कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों ने अपने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि आर्थिक अपराध शाखा और लोकायुक्त में दशकों से मामले पेंडिंग पड़े हुए हैं लेकिन चालान प्रस्तुत नहीं हुए हैं। जिससे भ्रष्टाचारियों के मंसूबे बढ़े रहते हैं और उन्हें लगता है कि कहीं कुछ होने वाला नहीं है और भ्रष्टाचार करते जाएं। एक्टिविस्टों ने कहा कि यह काफी दुखद बात है और टाइमली जस्टिस डिलीवरी सिस्टम पर जोर दिया जाना चाहिए और ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए जिससे मामलों का निपटारा बिल्कुल एक तय समय सीमा के अंदर हो जाए जिससे न्याय के लिए लोगों को भटकना न पड़े। बताया गया कई बार शिकायतकर्ता की मृत्यु के बाद मामले पर फैसला आता है।

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