प्रशासनिक कार्यवाही भिण्ड

भिंड की आंगनबाड़ी केंद्रों पर बांटा जा रहा “कुपोषित राशन”:बच्चों का कुपोषण दूर करने के लिए दिया घटिया पोषण आहार,

संवाददाता संजीव शर्मा भिण्ड

भिंड की आंगनबाड़ी केंद्रों पर बांटा जा रहा “कुपोषित राशन”:बच्चों का कुपोषण दूर करने के लिए दिया घटिया पोषण आहार, क्वालिटी की नहीं होती जांच, अफसर बोले- जांच में लगते हैं पैसे
संजीव शर्मा RB न्यूज़ भिण्ड

●आंगनबाड़ी केंद्र पर वितरित घटिया पोषण आहार में चींटी व कीड़े।

●दबोह की आंगनबाड़ी केंद्र से मामला आया प्रकाश में।
●जिले के अफसर मामले को दबाने में जुटे।
जिले में बच्चों का कुपोषण दूर करने के लिए शासन द्वारा हर महीने करोड़ों रुपए पोषण आहार पर खर्च किए जा रहे हैं। यह राशन हर महीने घटिया क्वालिटी का आहार स्व सहायता समूह बांटते आ रहे हैं। यह आहार की गुणवत्ता जांच, महिला एवं बाल विकास के अफसरों को करनी चाहिए। यह अफसर, आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करने के लिए जाते हैं, परंतु राशन को देखते ही मुंह फेर लेते है। इन अफसरों द्वारा अब तक राशन की क्वालिटी जांच के लिए सैंपलिंग नहीं कराई। इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी का स्पष्ट कहना है कि गुणवत्ता की जांच कराने में पैसा खर्च होता है।
जिले में 24 सौ से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र है। एक आंगनबाड़ी केंद्र पर बीस से पचास बच्चों काे प्रतिदिन राशन दिया जाता है। यह पोषण आहार पर सरकार प्रति महीने जिलेभर में करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। यह राशन बांटे जाने के बाद बच्चों की हेल्थ में कोई आश्चर्यजनक बदलाव नहीं आ रहा है। इसके पीछे कारण यह है कि जिले की आंगनबाड़ी केंद्रों पर बांटा जाने वाला राशन की गुणवत्ता घटिया रहती है। यहां निम्न गुणवत्ता का राशन देकर बच्चों की हेल्थ सुधार कार्यक्रम चल रहा है। ऐसी स्थिति में दिनोंदिन आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की संख्या गिरावट आ रही है।
जांच रिपोर्ट तैयार करने में हेराफेरी
बीते दिनों लहार अनुविभाग की आंगनबाड़ी केंद्रों पर निम्न गुणवत्ता का राशन दिया गया। यह शिकायत आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ताओं द्वारा परियोजना स्तर पर की गई। जब यह मामला दबोह की एक आंगनबाड़ी केंद्र से प्रकाश में आया तो अफसर जांच के लिए विवश हुए। महिला एवं बाल विकास के जिला कार्यक्रम अधिकारी अब्दुल गफ्फार ने जांच के आदेश दिए। इसके बाद जांच करने के लिए परियोजना अफसर अजय देव जाटव पहुंचे। यहां जांच में पाया पोषण आहार की क्वालिटी घटिया थी। राशन में कीड़े व चींटियां भी मौजूद थी। जब जांच रिपोर्ट तैयार की गई तो उसमें लाल चीटियां होने की पुष्टि की है। जबकि घटिया गुणवत्ता और कीड़े होने के बारे में कोई उल्लेख नहीं किया गया। पूरे मामले में जब परियोजना अधिकारी अजय देव जाटव से बातचीत करनी चाही, तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। इस मामले में सुपरवाइजर ज्योति तोमर का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र पर राशन की जांच की गई है। यह राशन दुर्गा स्व सहायता समूह भिंड के द्वारा भेजा गया है।
गुणवत्ता की जांच कराने में पैसा खर्च हाेता है
जब घटिया क्वालिटी के राशन को लेकर जिला कार्यक्रम अधिकारी अब्दुल गफ्फार से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि दबोह की आंगनबाड़ी केंद्र से शिकायत आई थी। जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई। जब उनसे पूछा गया कि स्व सहायता समूह द्वारा दिए जाने वाले राशन या पोषण आहार की गुणवत्ता की जांच विभागीय स्तर पर कैसे कराई जाती है। इस पर उन्होंने कहा कि शासन की गाइडलाइन स्व सहायता समूहों को दी गई है। अलग से कोई जांच नहीं होती। राशन की क्वालिटी चेक कराने में पैसा खर्च होता है।
मैं कार्रवाई करूंगा
इस मामले में कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। पूरे मामले की जांच होने के बाद जांच रिपोर्ट देखूंगा। यदि मामला सही पाया गया तो स्व सहायता समूह पर कार्रवाई करूंगा

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